एलबीएसएम कॉलेज के हिन्दी विभाग में `भक्ति साहित्य और समाज` विषयक व्याख्यान एवं स्नातकोत्तर विभागों की परिचयात्मक कक्षा आयोजित Jamshedpur (Anand Mishra) : जमशेदपुर के करनडीह स्थित एलबीएसएम कॉलेज के सेमिनार हॉल में मंगलवार को शैक्षणिक व्याख्यान श्रृंखला कि अगली कड़ी का का आयोजन किया गया. इसके अंतर्गत महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अविनाश कुमार सिंह ने `भक्ति साहित्य और समाज` विषय पर व्याख्यान दिया. इस व्याख्यान का आयोजन कॉलेज के हिन्दी विभाग की ओर से किया गया. इसे भी पढ़ें : स्वीकार">https://lagatar.in/let-us-accept-that-we-are-part-2-of-hemant-sarkar-champai-soren/">स्वीकार
करते हैं कि हम हेमंत सरकार के पार्ट-2 हैं : चंपाई सोरेन
जैन यूनिवर्सिटी : स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट में बजट पर पैनल डिस्कशन, जैव प्रौद्योगिकी व अंग्रेजी विभाग ने किया लैंगिक समानता पर वार्ता का आयोजन
सांसद ने राज्यसभा में ईशनिंदा कानून बनाये जाने की मांग की, कहा, सौ से अधिक देशों में लागू है यह कानून
के साथ बैठकर अब नयी कहानी गढ़ रहे हैं बाबूलाल : सुप्रियो
: पुनीत जीवन की यह पहल शहर में मिसाल बने, यही हमारी कामना है : रूचि नरेंद्र आयोजन के आरंभ में दीप प्रज्जवलित किया गया. उसके बाद हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो पुरुषोत्तम प्रसाद, राजनीति विज्ञान के अध्यक्ष विनय कुमार गुप्ता, वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो विनोद कुमार और संथाली विभाग के अध्यक्ष बाबूराम सोरेन को तुलसी पौधा देकर सम्मानित किया गया. इसलिए अवसर पर वाणिज्य विभाग के डॉ डीके मित्रा, विजय प्रकाश और हिन्दी विभाग के डॉ सुधीर कुमार ने अपना परिचय दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ विनय कुमार गुप्ता ने किया. इस अवसर पर डॉ दीपंजय, प्रो संतोष राम, डाॅ शबनम परवीन, डॉ रानी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. [wpse_comments_template]
करते हैं कि हम हेमंत सरकार के पार्ट-2 हैं : चंपाई सोरेन
भक्ति साहित्य ने समाज में प्रेम की भावना को फैलायी
डॉ अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि भक्ति साहित्य ने समाज में प्रेम की भावना को फैलाने का कार्य किया। धार्मिक सांप्रदायिक नफरत, कट्टरता और पारस्परिक ईर्ष्या-द्वेष का विरोध किया. भक्त कवियों ने बताया कि सबके भीतर एक ही ईश्वर या खुदा है। दोनों अलग-अलग नहीं हैं. भक्ति साहित्य ने यह सीख दी कि प्रेम नि:स्वार्थ, निष्काम और बिना शर्तों का होना चाहिए, जैसा मां का अपने बच्चे के प्रति होता है. मां सभी बच्चों से प्रेम करती है, जबमें उनमें टकराव होता है, तो उन्हें मिलाने का कार्य करती है. इसे भी पढ़ें : अर्का">https://lagatar.in/arka-jain-university-panel-discussion-on-budget-department-of-biotechnology-and-english-organized-a-talk-on-gender-equality-in-school-of-commerce-and-management/">अर्काजैन यूनिवर्सिटी : स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट में बजट पर पैनल डिस्कशन, जैव प्रौद्योगिकी व अंग्रेजी विभाग ने किया लैंगिक समानता पर वार्ता का आयोजन
नफरत की भावना पूरे समाज को तोड़ती है
उन्होंने कहा कि भक्ति साहित्य सामाजिक ताने बाने को बचाने की कोशिश करता है. नफरत की भावना पूरे समाज को तोड़ती है. वह पूरे समाज के लिए विनाशकारी है. संतों ने प्रेम के जरिये भारतीय समाज को बचाया. कबीर ने कहा- हमन हैं इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या, जायसी ने राजा रत्नसेन और पद्मावती की प्रेम कथा लिखी. तुलसीदास को समन्वयवादी कहा गया. संत निःसंग होते हैं, पर दुनिया के कल्याण के लिए उसके संग भी होते हैं. वे समाज से निर्लिप्त होकर भी उसके कल्याण की बात करते हैं. इसे भी पढ़ें : भाजपा">https://lagatar.in/bjp-mp-demanded-blasphemy-law-in-rajya-sabha-said-this-law-is-applicable-in-more-than-100-countries/">भाजपासांसद ने राज्यसभा में ईशनिंदा कानून बनाये जाने की मांग की, कहा, सौ से अधिक देशों में लागू है यह कानून
साझी संस्कृति को गढ़ने में भक्ति साहित्य की अहम भूमिका
भक्त कवियों का साहित्य समाज के साथ ही राजनीति, धर्म और अर्थनीति सबके लिए दिशा-निर्देशक है. हमारे देश की गंगा-जमुनी तहजीब और साझी संस्कृति को गढ़ने में भक्ति- साहित्य की अहम भूमिका है. शासक कभी भी जनता को एक होने देना नहीं चाहते, पर जनता मिलकर रहना चाहती है. इसी कारण भक्ति साहित्य अतीत में जितना प्रासंगिक था, आज वर्तमान में भी उतना ही प्रासंगिक है. वह हमारी विविधता, बहुरंगी समाज और लोकतंत्र के लिए जरूरी है. धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. पुरुषोत्तम प्रसाद ने किया। इस अवसर पर प्राचार्य डाॅ (प्रो) अशोक कुमार झा ने मुख्य वक्ता अविनाश कुमार सिंह को अंग-वस्त्र और तुलसी-पौधा देकर सम्मानित किया. व्याख्यान के दौरान डॉ डीके मित्रा, प्रो विनोद कुमार, डी दीपंजय श्रीवास्तव, बाबूराम सोरेन, प्रो. संतोष राम, डॉ शबनम परवीन, डॉ विजय प्रकाश और डॉ सुधीर कुमार भी मौजूद थे. संचालन डॉ विनय कुमार गुप्ता ने किया. इसे भी पढ़ें : ईडी">https://lagatar.in/babulal-is-now-creating-a-new-story-by-sitting-with-ed-supriyo/">ईडीके साथ बैठकर अब नयी कहानी गढ़ रहे हैं बाबूलाल : सुप्रियो
एलबीएसएम कॉलेज में स्नातकोत्तर विभागों की परिचयात्मक कक्षा का आयोजन
दूसरी ओर कॉलेज के सेमिनार हॉल में स्नातकोत्तर विभागों की ओर से आयोजित परिचयात्मक कक्षा का आयोजन किया गया. इसमें कॉलेज के प्राचार्य डॉ अशोक कुमार झा ने कहा कि स्नातकोत्तर विभागों के विद्यार्थियों को अध्ययन, शोध और कैरियर के प्रति गंभीर होना चाहिए. यदि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में जाना है, तो नेट की अच्छी तरह तैयारी करनी चाहिए. यदि वे लोक प्रशासन के क्षेत्र में अपनी सेवा देना चाहते हैं, तो उस क्षेत्र में सफल होने के लिए भी स्नातकोत्तर कक्षाओं के पाठ्यक्रम का गहरा अध्ययन उनके लिए जरूरी है. उन्होंने कहा कि एलबीएसएम कॉलेज में संथाली और वाणिज्य विषय में ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई हो रही थी. लेकिन इस साल से राजनीति विज्ञान और हिन्दी विषयों में भी स्नातकोत्तर की पढ़ाई आरंभ हुई है. प्राचार्य ने छात्रों से कहा कि कक्षाओं में उनकी उपस्थिति अनिवार्य है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-this-initiative-of-punit-jeevan-should-become-an-example-in-the-city-this-is-our-wish-ruchi-narendra/">जमशेदपुर: पुनीत जीवन की यह पहल शहर में मिसाल बने, यही हमारी कामना है : रूचि नरेंद्र आयोजन के आरंभ में दीप प्रज्जवलित किया गया. उसके बाद हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो पुरुषोत्तम प्रसाद, राजनीति विज्ञान के अध्यक्ष विनय कुमार गुप्ता, वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो विनोद कुमार और संथाली विभाग के अध्यक्ष बाबूराम सोरेन को तुलसी पौधा देकर सम्मानित किया गया. इसलिए अवसर पर वाणिज्य विभाग के डॉ डीके मित्रा, विजय प्रकाश और हिन्दी विभाग के डॉ सुधीर कुमार ने अपना परिचय दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ विनय कुमार गुप्ता ने किया. इस अवसर पर डॉ दीपंजय, प्रो संतोष राम, डाॅ शबनम परवीन, डॉ रानी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. [wpse_comments_template]
Leave a Comment