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जमशेदपुर : व्यापारी नेता केके अग्रवाल व संदीप मुरारका ने सिंहभूम चैंबर को कटघरे में खड़ा किया

Jamshedpur : जमशेदपुर के सैरात बाजार की दुकानों का भाड़ा विवाद गहराता जा रहा है. इस मामले में सिंहभूम चैंबर की पहल एवं आंदोलनात्मक कार्रवाई को कुछ व्यापारी नेताओं ने दिखावा एवं हवा-हवाई बताया. व्यापारी नेता कमल किशोर अग्रवाल एवं संदीप मुरारका ने संयुक्त रुप से जारी बयान में सैरात बाजार मामले में सिंहभूम चैंबर की कार्रवाही को झूठी वाहवाही एवं मिडिया में छाया रहने वाला बताया. दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कि जो व्यापारी संगठन अपनी जमीन नहीं बचा पाया. वह सैरात बाजार के दुकानदारों की लड़ाई क्या खाक लड़ेगा. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-namya-smile-foundation-and-vallabh-youth-organization-gave-smart-stick-to-divyang/">जमशेदपुर

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चैंबर भवन के सामने की जमीन टीके इंडिया को मिली

[caption id="attachment_331352" align="aligncenter" width="246"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/06/SANDIP-MURARKA-246x300.jpg"

alt="" width="246" height="300" /> संदीप मुरारका.[/caption] दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कि कुछ वर्ष पहले सिंहभूम चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री को टाटा स्टील लैंड डिपार्टमेंट की ओर से एक पत्र दिया गया. जिसमें चैंबर भवन के समक्ष 32600 वर्ग फुट भूमि उन्हें आवंटित की गई एवं सबलीज हेतु आवश्यक न्यूनतम शुल्क जमा करने का निर्देश दिया गया. टाटा स्टील ने इसके लिए एक लाख रुपये रुपये जमा कराने के लिए कहा. किंतु चैंबर के योग्य व सक्षम पदाधिकारियों ने टाटा स्टील के पत्र का जवाब देते हुये शुल्क की राशि एक लाख से घटा कर मात्र एक रुपए करने का आग्रह किया. टाटा स्टील ने उपरोक्त पत्र का जवाब तक नहीं दिया और आगे चलकर वह भूमि टीके इंडिया रियल इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित कर दी गई. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-tata-steel-mining-receives-kalinga-environment-excellence-award-2021/">जमशेदपुर

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32 लाख लूट में अल्टीमेटम के बाद नहीं हुआ आंदोलन

दोनों व्यापारी नेताओं ने चैंबर के पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए हुए कहा कि छगनलाल दयालजी एंड संस के 32 लाख लूटकांड के मुद्दे पर काला बिल्ला लगा कर धरना प्रदर्शन किया गया. माईक पर चिल्ला चिल्ला कर प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया. यह भी कहा गया कि यदि अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो 72 घंटे बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा. अखबारों में इनकी खूब तस्वीर छपी और व्हाट्सएप पर जोरदार छाए रहे. किंतु 72 घंटे की जगह 4 माह बीत गए, चैंबर के पदाधिकारियों ने ना कोई एक्शन लिया और ना कोई बयान दिया. दोनों कहा कि जो चैंबर के पदाधिकारी केवल फोटो सेशन व अखबार में नाम के लिये कार्य करते हैं. इसे भी पढ़ें : सरायकेला:">https://lagatar.in/seraikela-lakshmi-gagrai-became-the-block-head-vasudev-mahto-as-the-deputy-head/">सरायकेला:

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सैरात के दुकानदारों से कानूनी लड़ाई लड़ने की अपील

कमल किशोर अग्रवाल एवं संदीप मुरारका ने सैरात के दुकानदारों से अपील की कि वे अपनी लड़ाई स्वयं लड़ें. जमशेदपुर में कई विद्वान अधिवक्ता हैं, कई योग्य परामर्शदाता हैं, झारखंड सरकार व टाटा स्टील से सेवानिवृत हुए कई वरिष्ठ अधिकारी हैं, उनकी सलाह लें और कानूनी तरीके से अपने पक्ष को मजबूती से रखें. दूकानदार बेवजह चैंबर के पदाधिकारियों के बहकावे में ना आयें वरना वे लोग काला बिल्ला लगा कर फोटो खिंचवाने के चक्कर में सैरात की मूल लड़ाई की दिशा को भटका देंगे. क्योंकि पहले प्रथम पक्ष जुस्को अथवा टाटा स्टील हुआ करता था, अब स्वयं झारखंड सरकार है. यानी सैरात की बन्दोबस्ती एवं निर्माण की प्रकृति को भी बदले जाने की संभावना है. दोनों व्यापारी नेताओं ने सिंहभूम चैंबर पर कई मांगों को लंबित रखने तथा अपनी रोटी सेंकने का आरोप लगाया. [wpse_comments_template]

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