alt="" width="600" height="343" /> अन्नामृता फाउंडेशन परिसर में खड़े मुख्यमंत्री कैंटीन योजना के वाहन[/caption] इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-fee-reduced-by-rs-50-in-the-enrollment-form-of-inter-in-womens-college/">चाईबासा
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हर रोज 300 लोगों को कराया जाना था भोजन
सीएम कैंटीन योजना से शहर के बिष्टुपुर, साकची, जुगसलाई, कदमा, सोनारी, मानगो, सिदगोड़ा व बर्मामाइंस यानि आठ स्थानों पर आठ वाहनों के जरिए लोगों को भोजन कराया जा रहा था. दिन के 11.30 बजे से दोपहर 2.30 बजे एक वाहन से 300 लोगों को भोजन कराने का लक्ष्य था. भोजन में दाल, चावल व एक सब्जी शामिल थी. विभाग ने योजना के संचालन की जिम्मेदारी इस्कॉन से जुड़ी संस्था अन्नामृता फाउंडेशन को एमओयू करके दी थी. प्रति थाली भोजन पर 20 रुपये लागत आ रही थी, लेकिन संस्था कैंटीन पर भोजन के लिये आने वाले लोगों से 10 रुपये ही ले रही थी. बाकी के 10 रुपये राज्य सरकार दे रही थी. इसे भी पढ़ें :बंदगांव">https://lagatar.in/bandgaon-meeting-held-for-repair-of-water-tower-which-has-been-damaged-for-three-months-in-hudangda/">बंदगांव: हुडंगदा में तीन महीने से खराब जल मीनार की मरम्मत के लिए बैठक आयोजित
संस्था को सरकार ने दिए थे आठ वाहन, सेंट्रल किचन के लिये एक अलग से
[caption id="attachment_379935" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="343" /> अन्नामृता फाउंडेशन परिसर में खड़े मुख्यमंत्री कैंटीन योजना के वाहन.[/caption] अन्नामृता फाउंडेशन को विभाग ने आठ जगहों पर योजना संचालन के लिये आठ वाहन दिए थे. एक वाहन की कीमत 3.69 लाख रुपये थी और इसको भोजन वाहन के रूप में विकसित करने पर भी अलग से खर्च किया गया था. जबकि एक वाहन सेंट्रल किचन के लिये था, जो भेजन की डिलेवरी कर रहा था. सरकार की मंशा थी कि जमशेदपुर में योजना सफल होने पर इसे राजधानी समेत झारखंड के विभिन्न शहरों में लागू किया जाना था. सीएम कैंटीन योजना के तहत भोजन करने आने वाले ग्राहकों को नकद व पॉस मशीन के साथ-साथ पेटीएम से भी भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी. इसे भी पढ़ें :सरायकेला">https://lagatar.in/seraikela-water-supply-stalled-due-to-power-supply-disruption-bsnl-network-disappears/">सरायकेला
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प्रयास के नाम पर बस खुसर-फुसर
विभाग के जिम्मेदार लोग यह दावा कर रहे हैं कि योजना को शुरू करने के लिये प्रयास किए जा रहे हैं. योजना का संचालन करने वाली संस्था अन्नामृता फाउंडेशन के लोगों से सरकार के स्तर पर बात हो रही है. इधर, फाउंडेशन के लोग कहते हैं कि सरकार से हुई बातचीत के बाद ये बात सामने आई कि पहले मोटर यान निरीक्षक से वाहनों की जांच पड़ताल कराई जाए. एमवीआई ये रिपोर्ट दें कि वाहनों की स्थिति किस स्तर की है. वाहनों को क्या फिर से चलाया जा सकता है. मरम्मत में कितना खर्च आएगा, आदि. अब आलम ये है कि जमशेदपुर में लंबे समय से एमवीआई थे ही नहीं. रांची के एमवीआई ही यहां के प्रभार में थे. कुछ दिन पहले एमवीआई का पदस्थापन हुआ है, लेकिन उन्होंने अभी तक योगदान नहीं दिया है. मतलब, फिलहाल योजना को शुरू करने के नाम पर बस खुसर-फुसर ही हो रही है. पूर्वी सिंहभूम जिला आपूर्ति पदाधिकारी राजीव रंजन ने कहा कि मुख्यमंत्री कैंटीन योजना को फिर से चालू करने के लिए विभाग और संचालन करने वाली संस्था के स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि वाहनों की मरम्मत के बाद जल्द ही योजना फिर चालू हो जाएगी. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-improve-the-dealer-working-system-or-else-be-ready-for-action-district-supply-officer/">आदित्यपुर: डीलर कार्य प्रणाली में लाएं सुधार वरना कार्रवाई के लिए रहे तैयार- जिला आपूर्ति पदाधिकारी [wpse_comments_template]

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