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किसानों ने खाद्य सामग्री के मामले में देश को बनाया आत्मनिर्भर
alt="" width="750" height="422" /> उन्होंने कहा कि आज देश के किसानों ने अपनी मेहनत से देश को खाद्य सामग्री के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है. अब जरुरत है किसानों को जागरुक एवं शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने की, तभी देश का सच्चे मायने में विकास हो पाएगा. राज्यापल ने कहा कि हम कहने को तो कहते हैं कि देश की ज्यादातर आबादी गांव में निवास करती है लेकिन सच्चाई यह है कि गांव के लोग शहरों पर निर्भर करते हैं. पहले गांव में लोगों की जरुरतें गांव के लोग ही पूरी करते थे. ग्रामीण केवल नमक शहर से खरीदते थे. लेकिन आज स्थिति बिल्कुल विपरीत है. शहर में दूध गांव से आता है, लेकिन गांव में दूध नहीं मिलेगा, जबकि शहर में 24 घंटे दूध उपलब्ध रहता है. ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की जरुरत है. इससे पूर्व अतिथियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया. स्वागत भाषण करीम सिटी कॉलेज के प्रचार्य मोहम्मद रेयाज दिया. इसे भी पढ़ें : चंदवाः">https://lagatar.in/two-arrested-with-two-kilos-of-opium-and-cash/">चंदवाः
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गांवों के विकास से ही देश आर्थिक रूप से मजबूत होगा : कुलपति
विशिष्ट अतिथि कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ गंगाधर पांडा ने कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि हम जिस भूमि पर रहते वह हमारी माता है और हम उसके पुत्र है. इसलिए किसानों को धरतीपुत्र कहा जाता है. आज भी देश की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है. इसलिए गांवों के विकास से ही देश आर्थिक रुप से मजबूत हो पाएगा. ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए नाबार्ड द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है. इसके साथ किसानों को शिक्षित करने की आवश्यकता है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-gang-selling-land-by-making-fake-documents-exposed-four-went-to-jail/">चांडिल: जाली कागजात बनाकर जमीन बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, चार गए जेल
किसानों की आर्थिक आजादी के लिए बना किसान क्रेडिट कार्ड
नाबार्ड के महाप्रबंधक गौतम सिंह ने कहा कि नाबार्ड द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के विकास के उद्देश्य से 1990 में छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करने की शुरुआत की थी. वहीं किसानों की आर्थिक आजादी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की शुरुआत की गई. एसएचजी को डिजिटलाइज किया जा रहा है. कृषि आर्थिक विशेषज्ञ केजेएस सत्य साईं ने कहा कि झारखंड में किसानों की स्थिति बहुत खराब है. पिछले कुछ वर्षों में किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होने के बजाए कमी आई है. एक सर्वे के अनुसार झारखंड के किसानों के परिवारों के मासिक आय मात्र 4718 रुपये है. इसे भी पढ़ें : आजादी">https://lagatar.in/road-will-be-built-for-the-first-time-after-independence-forest-department-is-not-giving-noc-resentment-among-villagers/">आजादीके बाद पहली बार सड़क स्वीकृत, वन विभाग नहीं दे रहा एनओसी, ग्रामीणों में आक्रोश

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