Jamshedpur ( Sunil Pandey) : बंगभाषियों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को उपायुक्त की अनुपस्थिति में उनके निजी सहायक से मिला तथा उन्हें मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपा. जिसमें बंगला भाषा के साथ झारखंड में हो रहे भेदभाव पर खेद व्यक्त किया गया. साथ ही मुख्यमंत्री से बंगला भाषा को प्राथमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा उक्त भाषा की पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करने की मांग की गई. जिससे उक्त भाषा के छात्रों को सहुलियत हो. पोटका के हाता स्थित के संचालक सह साहित्यकार सुनील कुमार दे ने बताया कि एक ओर जहां केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा प्रथम वर्ग से पंचम वर्ग तक प्राथमिक शिक्षा में मातृ भाषा जरूरी घोषित कर दी गई है. लेकिन राज्य सरकार अन्य भाषाओं की तरह बंगला भाषा की पाठ्य पुस्तकों के मुद्रण का निर्देश जारी नहीं की है.
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सुनील कुमार दे ने बताया कि बंगला भाषा झारखंड की बुनियादी भाषा है. साथ ही यह अधिकांश आबादी की मातृ भाषा भी है. इसलिए सरकार को इस भाषा के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए. उन्होंने मुख्यमंत्री से उक्त भाषा की पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण कराने की अनुमति प्रदान करने की मांग की. जिससे भाषायी छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने में सहुलियत हो.प्रतिनिधि मंडल में पूर्व पार्षद करूणामय मंडल, देवू गोप (वीणापाणी संघ, गोविंदपुर), पल्लव दत्त, पंसस नारायण बेसरा, मुनिराम बास्के आदि शामिल थे.
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