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जमशेदपुर : भगवान वामन की पूजन करने वाले भक्तों को कभी कष्ट नहीं होता : महंत राम पूजन

Jamshedpur (Sunil Pandey) : बागबेड़ा के लकड़ी बगान स्थित श्री सप्तर्षि आश्रम सीता राम मंदिर में बुधवार को वामन जयंती धूमधाम से मनाई गई. इस मौके पर बिहार के आरा स्थित श्री त्रिदंडी स्वामी आश्रम के महंत श्री स्वामी ज्योति नारायणाचार्य आए हुए थे. उनके द्वारा पूजा पूरे विधि विधान के साथ कराई गई. वहीं, सप्तर्षि आश्रम के महंत राम पूजन दास के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया. इससे पहले सीताराम मंदिर में भगवान वामन का चित्र स्थापित कर उनका गाय का दूध से अभिषेक किया गया. उसके बाद वस्त्र और आभूषण से उन्हें सुशोभित किया गया. तत्पश्चात विभिन्न प्रकार के फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया.पूजा के उपरांत मंगल आरती की गई. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-breaking-the-lock-of-vishwakarma-cultural-building-robbery-case-registered/">जमशेदपुर

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भगवान विष्णु के पांचवे अवतार थे “वामन”

आश्रम के महंत राम पूजन दास ने बताया की भगवान वामन की पूजन करने वाले भक्तों को कभी कष्ट नहीं होता. उन्हें भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. भगवान वामन के रूप में भगवान विष्णु ने माता आदिति के गर्भ में जन्म लिया था. उन्होंने कहा कि सृष्टि में धर्म की रक्षा के लिए भगवान वामन ने अवतार लिया. पौराणिक कथा के अनुसार भगवान वामन भगवान विष्णु के पांचवें अवतार थे. उन्होंने कहा कि भगवान वामन ने प्रहलाद पौत्र राजा बलि का अभिमान तोड़ने के लिए तीन कदमों में तीनों लोक नाप दिए थे. भागवत पुराण में वर्णन किया गया है की अत्यंत बलशाली दैत्य भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद के पौत्र और दानवीर राजा होने के बावजूद राजा बलि एक अहंकारी राक्षस था. वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर देवताओं और ब्राह्मणों को डराया, धमकाया करता था. अत्यंत पराक्रमी और अजेय बलि अपने बल से स्वर्ग लोक, भू-लोक और पाताल लोक का स्वामी बन गया. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-sister-varsha-patel-was-murdered-by-asi-dharmendra-singh-jaya-patel/">जमशेदपुर

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राजा बलि का तोड़ा था अभिमान

राजा बली का अभिमान तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने वामन के रूप में धरती पर अवतरित हुए. ऐसे में राजा बलि के पास अपना वचन पूरा करने का कोई विकल्प नहीं बचा था. अंत में राजा बलि ने भगवान के समान अपना सिर आगे रख दिया. भगवान वामन के उसके सिर पर पग रखते ही उनका पग छोटा हो गया. उन्होंने राजा बलि को मोक्ष का वरदान दिया.इस अवसर पर मनोज पांडे, आशीष कुमार, अमर झा, संघी भगत, जयप्रकाश यादव आदि उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-id-proof-is-no-longer-necessary-in-the-application-for-trade-apprentice-in-tata-steel/">जमशेदपुर

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