: गिरिडीह से “मरांग बुरु” बचाओ आंदोलन की शुरुआत 17 जनवरी को करेंगे : सालखन
जैन और जनजातीय समुदाय दोनों की आस्था का है केंद्र
[caption id="attachment_518335" align="alignnone" width="1024"]alt="" width="1024" height="473" /> जनजातीय समुदाय का पूजा स्थल[/caption] पारसनाथ पहाड़ जैन धर्मावलंवियों के अलावे आदिवासियों विशेषकर संथालों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. सोहराय एवं वैशाख पुर्णिमा के मौके पर झारखंड के अलावा बंगाल, उड़ीसा एवं नेपाल से संथाल समाज के लोग यहां पूजा करने पहुंचते हैं. संथाली एवं जैन दोनों की अलग-अलग संस्कृति है. जैन समाज के लोग जहां पूरी तरह से शाकाहारी होते हैं जबकि संथालियों की पूजा में बलि प्रथा प्रचलित है. लेकिन जिस तरह पहाड़ पर जैनियों के अराध्य पार्श्वनाथ समेत बीस तीर्थंकर एवं संथालों के अराध्य मारांग बुरू एक साथ हैं, उसी तरह दोनों समुदाय के लोग भी आपस में मिलजुलकर अपनी-अपनी पद्धति से पूजा-अर्चना करते हैं. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-dissatisfied-with-the-police-action-congress-leader-met-jharkhand-in-charge-avinash-pandey-in-delhi/">आदित्यपुर
: पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट कांग्रेसी नेता दिल्ली में मिले झारखंड प्रभारी अविनाश पांडेय से
सरकार का निर्णय आस्था से खिलवाड़
कमल किशोर अग्रवाल ने कहा कि पारसनाथ पहाड़ भगवान पार्श्वनाथ एवं जनजातीय समुदाय के अराध्य मारांग बुरू की एकता का केंद्र है. झारखंड सरकार द्वारा जैन धर्म के सबसे धार्मिक स्थल सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करना जैन समाज एवं आदिवासी समुदाय की आस्थाओं से खिलवाड़ करने जैसा है. इस निर्णय के विरोध में जैन संत बलिदान होने को तैयार हैं. पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन सरकार से मांग करती है कि उक्त परिक्षेत्र तीर्थ स्थल ही रहने दिया जाय. उन्होंने कहा कि समाज इस मामले में जैन समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-attacked-with-stone-for-not-paying-extortion/">जमशेदपुर: रंगदारी नहीं देने पर पत्थर से किया हमला [wpse_comments_template]

Leave a Comment