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जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन ने जैन समाज की मांगों का किया समर्थन

Jamshedpur (Sunil Pandey) : झारखंड का प्राचीन तीर्थ स्थल श्री सम्मेद शिखर जी जैन समाज की आस्था का केंद्र है, साथ ही आदिवासी समुदाय की धार्मिक आस्थाएं भी सम्मेद शिखर पर्वत के साथ जुड़ी हुई है. उक्त बातें पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन ने कही. प्रदेश प्रवक्ता कमल किशोर अग्रवाल, अध्यक्ष संदीप मुरारका, महासचिव अभिषेक अग्रवाल गोल्डी, कोषाध्यक्ष पीयूष गोयल, अग्रवाल युवा मंच के अध्यक्ष रोहित अग्रवाल, महासचिव महेश भाऊका एवं कोषाध्यक्ष गौरव अग्रवाल ने संयुक्त रूप से जारी विज्ञप्ति में कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन सरकार से मांग करती हैं कि तुरंत प्रभाव से सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित करने का निर्णय वापस लिया जाए और तपो भूमि की पवित्रता बनाए रखने के लिए उसे धार्मिक स्थल ही रहने दिया जाए. कमल किशोर अग्रवाल ने बताया कि पारसनाथ पहाड़ (श्री सम्मेद शिखर) एवं इसकी तलहटी पर बसे शहर मधुबन की पहचान जैन धर्मावलंबियों के कारण पूरी दुनिया में है. देश-विदेश से जैन धर्म को मानने वाले लोग यहां पहुंचते हैं और पा‌र्श्वनाथ समेत 20 तीर्थंकरों की पूजा-अर्चना करते हैं. यहां के जैन मंदिर, धर्मशालाएं तथा प्राकृतिक सौंदर्य देखकर जो भी आता है, वह मोहित हो जाता है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-will-start-marang-buru-save-movement-from-giridih-on-january-17-salkhan/">जमशेदपुर

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जैन और जनजातीय समुदाय दोनों की आस्था का है केंद्र

[caption id="attachment_518335" align="alignnone" width="1024"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/sammed-shikahr.jpeg"

alt="" width="1024" height="473" /> जनजातीय समुदाय का पूजा स्थल[/caption] पारसनाथ पहाड़ जैन धर्मावलंवियों के अलावे आदिवासियों विशेषकर संथालों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. सोहराय एवं वैशाख पुर्णिमा के मौके पर झारखंड के अलावा बंगाल, उड़ीसा एवं नेपाल से संथाल समाज के लोग यहां पूजा करने पहुंचते हैं. संथाली एवं जैन दोनों की अलग-अलग संस्कृति है. जैन समाज के लोग जहां पूरी तरह से शाकाहारी होते हैं जबकि संथालियों की पूजा में बलि प्रथा प्रचलित है. लेकिन जिस तरह पहाड़ पर जैनियों के अराध्य पा‌र्श्वनाथ समेत बीस तीर्थंकर एवं संथालों के अराध्य मारांग बुरू एक साथ हैं, उसी तरह दोनों समुदाय के लोग भी आपस में मिलजुलकर अपनी-अपनी पद्धति से पूजा-अर्चना करते हैं. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-dissatisfied-with-the-police-action-congress-leader-met-jharkhand-in-charge-avinash-pandey-in-delhi/">आदित्यपुर

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सरकार का निर्णय आस्था से खिलवाड़

कमल किशोर अग्रवाल ने कहा कि पारसनाथ पहाड़ भगवान पा‌र्श्वनाथ एवं जनजातीय समुदाय के अराध्य मारांग बुरू की एकता का केंद्र है. झारखंड सरकार द्वारा जैन धर्म के सबसे धार्मिक स्थल सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करना जैन समाज एवं आदिवासी समुदाय की आस्थाओं से खिलवाड़ करने जैसा है. इस निर्णय के विरोध में जैन संत बलिदान होने को तैयार हैं. पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन सरकार से मांग करती है कि उक्त परिक्षेत्र तीर्थ स्थल ही रहने दिया जाय. उन्होंने कहा कि समाज इस मामले में जैन समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-attacked-with-stone-for-not-paying-extortion/">जमशेदपुर

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