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Jamshedpur : शहर के निजी स्कूलों की बच्चियों से पहले भी हो चुकी है दरिंदगी

  • निजी स्कूली वाहन चालकों के चरित्र सत्यापन की मांग
Jamshedpur (Sunil Pandey) : मानगो की नर्सरी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची के साथ वैन चालक द्वारा की गई दरिंदगी कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी जमशेदपुर के निजी स्कूलों में पढ़ने वाली अबोध बच्चियों से दरिंदगी हो चुकी है. ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मंगलवार को जमशेदपुर अभिभावक संघ के बैनर तले महिलाओं ने एसएसपी कार्यालय के पास प्रदर्शन किया. साथ ही निजी स्कूली वाहन चालकों के चरित्र सत्यापन की मांग की. इससे जुड़ा एक मांग पत्र वरीय पुलिस अधीक्षक को सौंपा गया. अभिभावक संघ के अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि शहर के निजी स्कूलों में पढ़ने वाली बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. कहा कि 18 सितंबर 2015 को बिरसानगर में स्कूली टेपों चालक द्वारा चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया. इसी तरह 15 मई 2016 को सोनारी में कक्षा 5 की छात्रा से वैन चालक ने दरिंदगी की. जबकि 2 अगस्त 2018 को एमजीएम थाना क्षेत्र में वैन चालक द्वारा कक्षा 6 की छात्रा के साथ वैन में दुष्कर्म किया गया. इतनी सारी घटनाएं होने के बाद भी प्रशासन की ओर से निजी स्कूली वाहन चालकों के चरित्र का सत्यापन नहीं किया गया. उन्होंने ऐसे सभी वाहन चालकों के चरित्र सत्यापन के साथ-साथ उनका नाम, फोटो, फोन नंबर एवं घर का स्थायी एवं वर्तमान पता पुलिस एवं स्कूल के रिकार्ड में रखने की मांग की. इसे भी पढ़ें :  Jamshedpur">https://lagatar.in/jamshedpur-drivers-panic-over-fitness-insurance-and-pollution-checks-of-school-vehicles/">Jamshedpur

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आदेश के बाद भी स्कूल प्रबंधन नहीं कर रहा बस की व्यवस्था

सर्वोच्य न्यायालय ने अपने रिट पिटीशन 13029/1985 व झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण ने01 अगस्त 2011 को आदेश जारी कर निजी स्कूल प्रबंधन को स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल आने व जाने के लिए स्कूल बस की व्यवस्था करने का आदेश जारी किया है. लेकिन जमशेदपुर में एक दो स्कूलों को छोड़ किसी भी स्कूल की अपनी बस सेवा नहीं है. ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए निजी स्कूली वाहन पर निर्भर करना पड़ता है. जबकि इन सभी निजी स्कूली वाहन चालकों में से किसी एक का भी रिकार्ड न निजी स्कूल प्रबंधन के पास है और न ही जिला प्रशासन के पास है. वहीं अगर कोई अभिभावक अगर इस संबंध में स्कूली वाहन चालक की खोज खबर लेना शुरू करते है या फिर किसी स्कूली वाहन चालक के गलत कृत्य का विरोध करते हैं तो उस क्षेत्र के सभी स्कूली वाहन चालक संगठित हो उस अभिभावक और उसके बच्चे का बहिष्कार कर देते है. ऐसे में कोई दूसरा स्कूली वाहन चालक उस बच्चे को स्कूल ले जाने से नकार देता है. थक हार कर अभिभावक चुप बैठ जाते हैं, और निजी स्कूली वाहन चालक मनमानी करते रहते हैं. वहीं बच्चियों से दुष्कर्म जैसे अमानवीय घृणित कृत वाहन चालकों (स्कूली) द्वारा किए जाने कि घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती है. इसे भी पढ़ें :  Chakradharpu">https://lagatar.in/chakradharpu-demand-letter-submitted-to-the-minister-for-boundary-wall-construction/">Chakradharpu

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