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जमशेदपुर : शहर में 80-90 के दशक में उभरा था हिदायत खान और आनंद राव गैंग

Jamshedpur  (Ashok kumar) : टेल्को के सुधापाल गैंग के खात्मे के बाद 1980-90 के दशक में हिदायत खान और आनंद राव का गैंग उभरा था. आनंद राव परसुडीह के लोको कॉलोनी का एक मजबूत गैंग हुआ करता था. इसी तरह से जुगसलाई के हिदायत खान का गैंग भी पुलिस के नाम में दम कर रखा था. तब आनंद राव और हिदायत खान के बीच तना-तनी चल रही थी. दोनों के बीच रेलवे में ठेकेदारी और स्वर्णरेखा परियोजना में ठेकेदारी को लेकर गैंगवार हुआ करता था. दोनों पर शहर के कई थाने में रंगदारी, लूट, हत्या के मामले दर्ज हैं. इसे भी पढ़ें : केंद्र">https://lagatar.in/central-governments-agneepath-scheme-at-the-door-of-the-supreme-court-scs-direction-list-the-matter-hearing-next-week/">केंद्र

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हिदायत खान के गिरोह में ये थे शामिल

हिदायत खान के गिरोह में मुख्य सदस्यों में से दारा शर्मा और सिट्टे खास था. दोनों की गैंगवार में जान चली गयी थी. इस बीच ही हिदायत खान कोलकाता में पुलिस के हत्थे चढ़ गया था. इसी तरह से आनंद राव गैंग में दर्जन भर से ज्यादा लोग शामिल थे. इसमें प्रभाकर राव और शफीक मुख्य था. दोनों की हत्या गैंगवार में हो गयी. सभी शहर के ही थे. इसमें से अधिकांश लोको कॉलोनी के ही रहने वाले थे. उसकी हत्या के बाद आनंद राव गैंग भी खत्म हो गया.

गरमनाला और हिदायत गैंग के बीच होता था टकराव

बिष्टुपुर के गरमनाला गिरोह में साहेब सिंह, बीरेंद्र सिंह उर्फ दाढ़ी बाबा के गैंग में शहर के अपराधियों का जुड़ाव था. जुगसलाई के हिदायत खान गैंग से वर्चस्व को लेकर बराबर टकराव होता था. स्क्रैप कारोबार और ठेकेदारी को लेकर दोनों गैंग के लोग आमने-सामने थे. शहर के बिष्टुपुर स्थित नटराज सिनेमा के पास दोनों गैंग के बीच गोली-बारी हुई थी. तब हिदायत खान गैंग का जुगसलाई का सिट्टे और बर्मामाइंस का दारा शर्मा मारा गया था.

पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था साहेब सिंह

तत्कालीन एसपी परवेज हयात के कार्यकाल में साहेब सिंह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था. मुठभेड़ में साहेब का करीबी सूर्या पटेल बच निकला था. बीरेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश में जिले से कोर्ट में पेशी के दौरान गैंगवार का शिकार हो गया था. मानगो के स्क्रैप कारोबारी शंकर सिंह और सुनिल सिंह की हत्या गरमनाला गिरोह से संपर्क रखने के कारण कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट पर अपराधियों ने कर दी थी.

1989 में हुई थी आनंद राव की हत्या

आनंद राव की हत्या 1989 में जुगसलाई रंग गेट के पास गोली मारकर कर दी गयी थी. इसमें सिर्फ आनंद राव की ही जान नहीं गयी थी, बल्कि कांग्रेस के तत्कालीन जिला अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा और जर्नादन चौबे की भी जान गयी थी. घटना के दिन 2 फरवरी 1989 को प्रदीप मिश्रा लोको कॉलोनी के रेलवे लोको शेड से काम करके घर की तरफ लौट रहे थे. इस बीच ही उनकी बाइक खराब हो गयी थी. इस बीच उन्होंने रास्ते में आनंद राव से लिफ्ट मांगी थी. अपराधियों ने आनंद राव को निशाना बनाया था, लेकिन कार में तीन लोग सवार थे और तीनों गोली का शिकार हो गये थे. घटना शाम 7.30 बजे घटी थी. घटना के बाद प्रदीप मिश्रा के सुरक्षा गार्ड ब्रह्मेश्वर पाठक के बयान पर जुगसलाई थाने में मामला दर्ज कराया गया था. घटना में मो. शहाबुद्दीन, रामा सिंह, कल्लू सिंह, पारस सिंह समेत अन्य को आरोपी बनाया गया था. साहेब सिंह और बीरेन्द्र सिंह की मौत घटना के बाद हो गयी थी. इस बीच बाकी के सभी आरोपियों को कोर्ट वे साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.

हिदायत की ठेकेदारी-स्क्रैप को लेकर गरमनाला गिरोह से थी दुश्मनी

बिष्टुपुर के गरमनाला गिरोह से हिदायत खान की ठेकेदारी और स्क्रैप को लेकर दुश्मनी थी. गरमनाला गिरोह का सरगना बीरेंद्र सिंह था. बीरेंद्र के नाम से ही गरमनाला सुर्खियो में था. इसका भी अपना एक अलग ही गिरोह हुआ करता था. बीरेंद्र जमशेदपुर के पहले उत्तर प्रदेश में अपना गैंग चलाता था. बीरेन्द्र के साथ उत्तर प्रदेश के भी कई अपराधी जुड़े हुये थे जो जमशेदपुर में अपना दबदबा बनाने में पूरा सहयोग करते थे. हिदायत खान और बीरेंद्र सिंह गैंग के बीच कई बार गैंगवार हुआ, लेकिन बीरेंदर्र की हत्या उत्तरप्रदेश में हत्या हो गयी थी. इसके बाद गरमनाला गैंग का सफाया हो गया.

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