Jamshedpur (Rohit kumar) : आदिवासी समाज का सेंदरा पर्व सोमवार को माना. सैकड़ों की संख्या में शिकारी पारंपरिक हथियार लेकर दलमा पहुंचे. कई टुकड़ियों में बंट जंगली जानवरों के शिकार के लिए दलमा के जंगल का भ्रमण किया. जानवरों का शिकार ना हो इसके लिए वन विभाग भी अलर्ट रहा. अलग-अलग टीम बनाकर दलमा में गश्ती की. विभिन्न चेकनाकों पर भी वन विभाग के अधिकारी अलर्ट रहे. शिकारियों को समझा बुझा कर वापस भेजा. इधर, देर शाम शिकारी दलमा से नीचे उतरे. शिकार से वापस आने के बाद फदलोगोड़ा में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सिंगराई नृत्य और लौ वीर दरबार का आयोजन हुआ. जिसमें आदिवासियों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई. इसमें काफी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लिया. देर शाम शिकारी अपने घर को वापस लौटे. शिकारियों के घर लौटने पर उनकी पत्नियों ने शिकारियों का जोरदार स्वागत किया. जिसके बाद पत्नियों ने श्रृंगार किया. जानकारी हो को शिकारियों के शिकार पर जाने से पूर्व उनकी पत्नियां सुहाग की निशानी चूड़ी उतार देती है. उनके वापस लौटने तक महिलाएं श्रृंगार भी नहीं करती है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-haryana-police-arrested-doda-businessman-from-chowka-police-station-area/">चांडिल
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जंगली जानवरों का शिकार रोकने के लिए दलमा और उसके आसपास के इलाकों में छह डीएफओ को तैनात किया गया था. प्रधान मुख्य वन संरक्षक शशिकर सामांत, सीसीएफ एस आर मेटेश भी दलमा में कैंप किए हुए थे. इको विकास समिति के पदाधिकारी और सदस्यों को भी विभिन्न जगहों पर गश्ती करने के लिए भेजा गया था. शिकारियों के दलमा में प्रवेश करने की सूचना पर अधिकारी उन्हें समझाते कर वापस भेजते देखे गए. वन विभाग ने किसी भी जानवरों का शिकार नहीं होने का दावा किया है. इसे भी पढ़ें : झारखंड">https://lagatar.in/policemen-of-jharkhand-jaguar-will-get-50-percent-stf-allowance-high-court-ordered/">झारखंड
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दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने कहा कि सेंदरा के दौरान जंगली जानवरों का शिकार नहीं हुआ. परंपरा निभाने के लिए शिकारी दलमा पहुंचे. जंगल घूम कर शिकारी जंगली जानवरों का शिकार किए बिना वापस आ गए. सभी शिकारी सकुशल घर लौट गए. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-two-including-son-of-rjd-leader-arrested-with-23-pudia-brown-sugar/">आदित्यपुर
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दलमा के डीएफओ अभिषेक कुमार ने कहा की इस साल भी
शिकार पर्व के दौरान दलमा में किसी भी जंगली जानवर का शिकार नहीं हुआ. कई चेकनाको पर शिकारियों को समझा बुझा कर वापस भेजा गया. दलमा में भी सघन गश्ती की गई. विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम के कारण पूर्व के वर्षों की तुलना में इस वर्ष काफी कम संख्या में लोग शिकार पर्व में शामिल हुए. [wpse_comments_template]
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