Jamshedpur (Vishwajeet Bhatt) : झारखंड भाजपा के प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात कर झारखंड में आयुष्मान योजना की दयनीय स्थिति, एमजीएम अस्पताल की बदहाली और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी पर विशेष संज्ञान लेने का आग्रह किया. कुणाल षाड़ंगी ने मनसुख मांडविया से आग्रह किया केंद्र की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. पूरे राज्य में बड़ी संख्या में प्राइवेट अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के अंतर्गत छोड़-बड़े सहित तमाम रोगों का इलाज करने से मना कर दिया है. इससे गरीब मरीजों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. अस्पतालों का कहना है कि सरकार उनकी बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रही है. कुणाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि क्या केंद्र सरकार के स्तर पर यह राशि लंबित है?
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स्वास्थ्य मंत्री ने अपने सचिव से वास्तविक स्थिति की जानकारी ली. सचिव ने सूचना दी कि केंद्र सरकार की तरफ से पूरी राशि राज्य में कार्यरत बीमा कंपनी को प्रीमियम के साथ भुगतान कर दी गई है. अस्पतालों को राशि का भुगतान राज्य स्तर से होना है. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से हम लगातार इस योजना और इसके राज्य स्तर पर क्रियान्वयन की समीक्षा करते हैं. स्वास्थ्य मंत्री ने कुणाल से कहा कि अगर सभी प्राइवेट अस्पताल जिनकी राशि बकाया है अथवा राज्य की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन शाखा भी पूरे ब्योरे के साथ इसकी लिखित सूचना केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को दें तो निश्चित रूप से जांच करके राज्य सरकार को उनका भुगतान सुनिश्चित करने हेतु अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक आयुष्मान योजना को धरातल पर उतारने के लिए कटिबद्ध है, ताकि योग्य लाभुकों को प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ मिल सके.
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कुणाल ने राज्य में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी की ओर मंत्री का ध्यान आकर्षित करवाया. इसके अतिरिक्त, उन्होंने शिक्षक दिवस के दिन घाटशिला निवासी गणित शिक्षक उज्ज्वल गुइन का कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में विभागीय उदासीनता के कारण इलाज न होने से हुई मौत की ओर ध्यान आकृष्ट कराया. उन्होंने बताया कि गंभीर हालत में अस्पताल लाने पर उन्हें जमीन पर ही तड़पने के लिए छोड़ दिया गया और उनका इलाज भी नहीं किया गया. कुणाल ने कहा कि एमजीएम अस्पताल की बढ़ती बदहाली से यह झारखंड के माथे पर कलंक के रूप में स्थापित हो चुका है. उन्होंने एमजीएम अस्पताल में लगातार हो रही ऐसी घटना पर केंद्र सरकार की सीधी पहल की मांग की है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वे जल्द ही राज्य के विभागीय पदाधिकारियों के साथ इन सभी विषयों पर समीक्षा करेंगे. [wpse_comments_template]
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