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जमशेदपुर : माझी परगना महाल ने कुर्मी को एसटी में शामिल करने का किया विरोध

 
Jamshedpur (Ashok Kumar) : माझी परगना महाल धाड़ दिशोम पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की ओर से कुर्मी को एसटी में शामिल करने की मांग का विरोध किया गया है. धाड़ दिशाम देश परगाना बैजू मुर्मू ने स्वर्णरेखा गेस्ट हाउस में प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि कुर्मी जाति में आदिम विशेषतायें नहीं है. किसी भी समुदाय को एसटी में घोषित करने के लिये पांच मानको की जरूरत होती है. पहला जनजातीय गुण, दूसरा विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, तीसरा भूभाग में रहना, चौधा बातों को रखने में झीझकना और पांचवा आर्थिक रूप से पिछड़ा होना. कुर्मी में यह सब नहीं है. कुर्मियों का रहन-सहन, खान-पान, परंपरा, पूजा पाठ का तरीका बिल्कुल अलग है. कुर्मियों का गोत्र आर्यों की तरह ऋषि-मुनियों से जुड़ा है. ये मराठों का वंशज है. ये शिवाजी महाराज के वंशज के रूप में दावा भी कर चुके हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-angry-with-public-representatives-bagbera-residents-themselves-built-a-dilapidated-road/">जमशेदपुर

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कुर्मियों का आदिवासी होने का दावा निराधार

प्रेसवार्ता में वक्ताओं ने कहा कि कुर्मियों का आदिवासी होने का दावा बिल्कुल ही निराधार है. 1833 में विल्किंसन रूल में इसकी पहचान और सुरक्षा का कोई जिक्र ही नहीं है. छोटानागपुर संताल परगना के जमीन और जमींदार कानूनों में भी कुर्मी का जिक्र नहीं है.

सब्जी की खेती के लिये ब्रिटिश काल में दी गयी थी जमीन

ब्रिटिश काल में सभी गवर्नर लार्ड विलियम बेंटिक ने कुर्मी जैसी कृषक जाति को सब्जी की खेती के लिये तत्कालीन छोटानागपुर में बसाया था और जमीन दी थी. विद्रोह में भी कुर्मियों की की भुमिका नहीं थी. कुर्मी जाति की भाषा कुरमाली है. कुर्मी आंदोलन राजनीतिक से प्रेरित है. इनका मकसद सिर्फ नौकरी में आरक्षण लेने से नहीं बल्कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को भी हासिल करना चाहते हैं. ये आदिम आदिवासियों को हाशिये पर धकेलकर खत्म करना चाहते हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-measured-for-road-construction-in-vaidyanath-mahadev-temple-premises/">जमशेदपुर

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