Jamshedpur (Sunil Pandey) : आधुनिकता के नाम पर एक तरफ भारतीय सनातन समाज में कुछ लोग अपनी भाषा,संस्कृति, धर्म और परंपरा को छोड़ रहे है. दूसरी तरफ आज भी कुछ लोग अपनी भाषा, संस्कृति, धर्म और परंपराओ को जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं. इसी सिलसिले में जेठ महीने की शुक्ल अमावस्या तिथि को वट सावित्री की पूजा की जाती है. शुक्रवार को उक्त तिथि पर सनातनी विवाहित महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए पूजा की. सती सावित्री ने इसी दिन व्रत और तपस्या के बल पर यमराज को संतुष्ट करके अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवित किया था.
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हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विभिन्न गांव की विवाहित महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखकर हाता के माताजी आश्रम के वट वृक्ष के नीचे यमराज की पूजा अर्चना की और अपने अपने पति के लिए लंबी आयु की कामना की. इस दौरान सभी महिलाओं ने वट वृक्ष में धागा बांधा और परिक्रमा की. पंडित सुधांशु मिश्र और कमल मिश्र ने पूजा-अर्चना की तथा व्रतधारिओं को बट सावित्री की कथा सुनाई.
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