Jamshedpur : जिले के जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के झरिया गांव में ब्रेन मलेरिया से एक युवक की मौत हो गई है. इलाज के लिए रांची ले जाने के दौरान रास्ते में तबीयत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान 25 वर्षीय रितिक सिंह के रूप में हुई है. लंबे इलाज में परिवार की पूरी जमा-पूंजी खर्च हो गई, जिससे अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं बचें. परिजनों ने झारखंड सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है.

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मृतक के परिजनों ने बताया कि रितिक के इलाज में करीब 30 हजार रुपये खर्च हो गए. परिवार दिहाड़ी मजदूरी करके अपना गुजारा करता है. इलाज के लिए जो भी बचत थी. वह पूरी तरह खत्म हो गई. परिवार का कहना है कि अब उनके पास अंतिम संस्कार का खर्च उठाने तक की क्षमता नहीं बची है. चाचा बाबूलाल सिंह ने भावुक होकर सरकार से आर्थिक मदद की अपील की.
परिजनों के अनुसार, रितिक की तबीयत 5 जून को खराब हुई थी. जांच में उसके ब्रेन मलेरिया से संक्रमित होने की जानकारी मिली. शुरुआत में दो दिनों तक घर पर ही इलाज कराया गया. हालत में सुधार नहीं होने पर उसे गालूडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. कुछ दिनों के इलाज के बाद छुट्टी मिल गई, लेकिन तबीयत फिर बिगड़ने पर दोबारा उसी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.
इसके बाद डॉक्टरों ने उसे जमशेदपुर सदर अस्पताल रेफर किया. वहां जांच के बाद बेहतर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल भेजा गया. एमजीएम अस्पताल में भी हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने रांची के रिम्स रेफर किया. रांची ले जाने के दौरान रास्ते में तबीयत और बिगड़ गई. इस कारण उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
रितिक का शव निजी वाहन से झरिया गांव लाया गया, जहां शनिवार देर शाम उसका अंतिम संस्कार किया गया. युवक की मौत के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है. ग्रामीणों में भी ब्रेन मलेरिया को लेकर डर और चिंता बढ़ गई है.
जानकारी के अनुसार, अब तक इस बीमारी से छह लोगों की मौत हो चुकी है. लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला सिविल सर्जन डॉ. साहिर पॉल के निर्देश पर क्षेत्र में अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती की गई है.
स्वास्थ्य विभाग ने पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी प्रशासनिक बदलाव किया है. ब्रेन मलेरिया से लगातार हुई मौतों के बाद प्रभारी रजनी कांत महाकुड को निलंबित कर डॉ. सुकांत सीट को नया प्रभारी बनाया गया है. अब उनके सामने क्षेत्र में ब्रेन मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है.
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