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जमशेदपुर : शायर मेराज अहमद मेराज के सम्मान में काव्य गोष्ठी आयोजित

Jamshedpur (Dharmendra Kumar) : कुल्टी (आसनसोल) से आए हुए उर्दू के प्रसिद्ध शायर मेराज अहमद मेराज के सम्मान में जमशेदपुर की साहित्यिक संस्था "शायकीने शेर-व-अदब, जमशेदपुर" के तत्वावधान में सोमवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. प्रो अहमद बद्र के निवास पर गोष्ठी आयोजित हुई. इसमें शहर के कई प्रसिद्ध शायरों ने अपनी गजलें सुनाई और अतिथि शायर से रचनाएं सुनीं. गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष प्रो अहमद बद्र ने की. उन्होंने अपने स्वागत भाषण में कहा कि मेराज अहमद मेराज एक ऐसे शायर हैं, जिनके लिए दिल में सम्मान की भावना इसलिए जगती है क्योंकि कुल्टी में इन्होंने जो साहित्य का माहौल बनाया है उसका दूसरा उदाहरण नहीं मिलता. यह काव्य गोष्ठी नौजवान शायर सफीउल्लाह सफी के द्वारा पढ़ी गई नात शरीफ के साथ प्रारंभ हुई. उन्होंने गजल भी सुनाई. सफी ने पढ़ा- अमन के इस शहर को जाने नजर किसकी लगी खाली हाथों को यहां देने लगा शमशीर कौन इसके बाद गौहर अजीज ने अपनी ग़ज़ल के शेर पढ़ें - न निकलो शुब्ह दम गौहर यहां सैरे चमन को कि उठ जाता है दर्द-ए-इश्क भी पुरवाइयों में गौहर अजीज के बाद डॉ अफसर काजमी ने अपनी ग़ज़ल सुनाई- किसी दिन देखना मंजिल तेरे कदमों में होगी तू अपने रहनुमा के नक्शे पा का सिलसिला ले ले रिजवान औरंगाबाद का शेर कुछ इस तरह था कि माजी के साथ हुस्न की पाकीजगी गई दौरे जदीद इश्क के आदाब ले गया अतिथि शायर मेराज अहमद मेराज ने गोष्ठी में अपनी कई रचनाएं प्रस्तुत की. उनकी गजल का एक शेर इस प्रकार था कि जुगनू से कह दो बाग में जाए न भूल कर बारूद जिस जगह है शरारा न जाएगा अध्यक्षता कर रहे प्रो अहमद बद्र ने शेर पढ़ा कि बेटों ने जब बना लिया परदेस को वतन बेटी को बाप लख्ते जिगर बोलने लगा इनके अलावा असर भागलपुरी ने पढ़ा- जी मेरा लगता नहीं यह सोचकर तामीर में एक जा लिखा नहीं रहना मेरी तकदीर में वहीं मुस्ताक राज का शेर इस प्रकार था कि चिराग हैं तो हमें दिन से लेना देना क्या हमारा काम तो रातों को जगमग आना है. गोष्ठी का संचालन रिजवान औरंगाबादी ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रो अहमद बद्र ने किया. [wpse_comments_template]

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