Jamshedpur : एससीएसटी, ओबीसी माइनॉरिटी वेलफेयर समिति के तत्वावधान में विभिन्न समूहों और संगठनों की बैठक सोमवार को दुसाध भवन में संपन्न हुई. बैठक में लखनऊ विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के दलित प्राध्यापकों पर की गई कार्रवाई के प्रति सामूहिक रूप से विरोध किया गया. इस मौके पर समिति के सचिव तापस चट्टराज ने कहा कि प्राध्यापक रविकांत चंदन और रतनलाल ने ज्ञानवापी मस्जिद के ताजे प्रकरण पर अपनी बात रखी थी, जो मुस्लिम व मस्जिद विरोधी कुछ संकीर्ण सांप्रदायिक हिन्दुओं को नागवार गुजरा. उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर आपराधिक असहिष्णुता को छूट नहीं दी जा सकती. अभिव्यक्ति के अधिकार को दंडित नहीं किया जा सकता है. विभिन्न समुदायों, परम्पराओं, हितों, विचारों और आस्थाओं वाले देश में किसी एक समुदाय या आस्था को श्रेष्ठ और निर्णायक नहीं माना जा सकता है. इसे भी पढ़े : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-jcert-will-issue-model-paper-by-the-end-of-may/">जमशेदपुर
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ऐतिहासिक अंतर्विरोधों को लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाया जा सकता है
तापस चट्टराज ने कहा कि ऐसी विविधता और ऐतिहासिक अंतर्विरोधों को लोकतांत्रिक तरीके से ही सुलझाया जा सकता है. प्रो. डॉ. रतनलाल और प्रोफेसर रविकांत के खिलाफ की गई कारवाई गलत है. इस अवसर पर अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे. आज के बैठक में मुख्य रूप से रवीन्दर प्रसाद, सुरेश प्रसाद, रामकवीन्द्र, जयचंद प्रसाद, देवाशीष, जगत, अशोक शुभदर्शी, बबलू , सुबोध रविदास, बालेश्वर दास, अरविन्द रजक, ओमप्रकाश सिंह, तापस चट्टराज, सबुर दास, ब्रह्मदेव राम, गौरी देवी, सुशील कुमार, प्रदीप कुमार, ताराकांत पासवान, भागवत प्रसाद, उपेन्द्र बानरा, नागराज, बी लाल, अजय कुमार आदि उपस्थित थे. इसे भी पढ़े : जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-two-arrested-with-weapons-in-birsanagar-came-on-bail-10-days-ago/">जमशेदपुर:बिरसानगर में हथियार के साथ दो गिरफ्तार, 10 दनों पहले हीआया था जमानत पर [wpse_comments_template]
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