- विधानसभा में मामला उठाया तो सरकार के जवाब से मिली जानकारी
- सरयू राय ने सरकार से उक्त संकल्प को विलोपित करने की मांग की
- रघुवर सरकार ने 10 डिसमिल बंदोबस्त करने का लिया था निर्णय
: लोकतंत्र की हत्या कर संविधान खत्म करना चाहती है भाजपा – सुखराम उरांव इस मामले में विभागीय मंत्री का जवाब पूरा नहीं हो पाया. क्योंकि भाजपा विधायकों के हंगामे के कारण सदन ठीक से नहीं चल पाया. विधायक सरयू राय ने कहा कि वर्ष 2018 में तत्कालीन सरकार द्वारा जारी किया गया यह आदेश जमशेदपुर वासियों को मालिकाना हक दिलाने में सबसे बड़ा बाधा बना हुआ है. लेकिन विधायक सरयू राय ने कहा कि सरकार इस मामले में जो भी निर्णय ले वह वह बस्तीवासियों को मालिकाना हक दिलाने का विषय वह भविष्य में फिर से उठाएंगे, क्योंकि उनकी यह लड़ाई अभी अधूरी है. ज्ञात हो कि 2005 में हुए टाटा लीज नवीकरण समझौता के तहत शिड्यूल-5 में स्थित अवैध 86 बस्तियों को लीज भूमि से अलग कर दिया गया. उसके बाद सर्वेक्षण कराया गया. जिसमें 14,167 प्लॉटों में लगभग 1800 एकड़ भूमि लीज से बाहर की गई है. इसमें 17,986 मकान बने हुए हैं, जिसका क्षेत्रफल करीब 1100 एकड़ है. [wpse_comments_template]
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