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जमशेदपुर : राजकुमार शुक्ल शोध संस्थान ने पं. राजकुमार शुक्ल को दी श्रद्धांजलि

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Jamshedpur(Dharmendra Kumar) : राजकुमार शुक्ल शोध संस्थान द्वारा मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी पं. राजकुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन किया गया. एक ऐसे किसान नेता जो भारत के इतिहास में सबसे पहले किसानों की भलाई के लिए अपना सब कुछ त्याग किया. जो सही अर्थो में किसान नेता थे. ऐसे महापुरुष भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सिपाही और चंपारण आंदोलन के अग्रदूत पंडित राजकुमार शुक्ल की 148 वीं जयंती पर संस्थान के सदस्यों द्वारा उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए ऑनलाइन बैठक आहूत की गई. इस वर्चुअल मीटिंग में राजकुमार शुक्ल शोध संस्थान के संरक्षक रामसुंदर दसौंधी, वर्कर्स कॉलेज के इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापिका डॉ पुष्पा तिवारी, डीबीएमएस कॉलेज ऑफ जमशेदपुर की प्राचार्य डॉ जूही समर्पिता, मुंबई से शिक्षाविद अर्चना राय और संस्तान से जुड़े अनेक सदस्यों ने अपने विजार रखे.. राजकुमार शुक्ल शोध संस्थान के संरक्षक रामसुंदर दसौंधी ने उन्हें सच्चे अर्थो में किसान नेता बताया. कैसे पंडित राजकुमार शुक्ल ने महात्मा गांधी को चंपारण के आंदोलन से जोड़े इस संबंध में उन्होंने विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि पंडित राजकुमार शुक्ल ने अपने पत्र में पहली बार गांधी को महात्मा शब्द से संबोधन किया था. तब से मोहनदास करमचंद गांधी महात्मा गांधी के नाम से जाने लगे. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-parent-teacher-meeting-held-in-kuruktopa-ichagarh/">चांडिल

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वहीं डॉ पुष्पा तिवारी ने पं.राजकुमार शुक्ल को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक अमर स्वतंत्रता सेनानी बताया. शिक्षाविद अर्चना राय ने राजकुमार शुक्ल को भारतीय किसान आंदोलन का एक प्रेरणा स्रोत व्यक्तित्व के रूप में याद किया.डॉक्टर जूही समर्पिता ने कहा कि राजकुमार शुक्ल अपने त्याग और अथक प्रयास से मोहनदास करमचंद गांधी को चंपारण आंदोलन से जोड़ कर अंग्रेजों के खिलाफ रष्ट्र्यापी आंदोलन खड़ा किया.राजकुमार शुक्ला शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉ अरुण सज्जन ने आजादी अमृत महोत्सव के अवसर पर याद करते हुए भारतीय इतिहास में किसान आंदोलन का सबसे बड़ा नेता बताया. उन्होंने कहा कि आज जब देश में किसान आंदोलन का स्वरूप बदल गया है.पता नहीं किसान आंदोलन से किसानों का कितना भला हो रहा है? उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम किसान नेता के रूप में पंडित राजकुमार शुक्ल जिन्होंने चंपारण के हजारों किसानों को एकजुट कर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की थी. इस वर्चुअल मीटिंग में धन्यवाद ज्ञापन पुष्पा तिवारी ने किया. [wpse_comments_template]
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