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जमशेदपुर : चाइल्ड ट्रैफिकिंग एवं मिशन वात्सल्य से अवगत हुए आरपीएफ के अधिकारी व जवान

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Jamshedpur (Sunil Pandey) : चाइल्ड ट्रैफिकिंग (बाल तस्करी) एवं मिशन वात्सल्य को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन रविवार को टाटानगर स्टेशन स्थित आरपीएफ कांफ्रेंस हॉल में किया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आयोजित उक्त कार्यशाला में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी प्रशांत सिंह एवं श्रीप्रिया के अलावे पैनल लॉयर प्रीति मुर्मू एवं बर्नाली सरकार मौजूद थे. सभी वक्ताओं ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग एवं मिशन वात्सल्य पर विस्तार से प्रकाश डाला. प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी प्रशांत सिंह ने कहा कि ट्रैफिकिंग का सबसे सुगम रास्ता रेल मार्ग बन गया है. ऐसे में आरपीएफ जवानों की जवाबदेही एवं जिम्मेदारी बढ़ जाती हैं. उन्होंने आरपीएफ के अधिकारियों एवं जवानों से ऐसे मामलों में गहराई से पुछताछ एवं छानबीन करने पर जोर दिया. जिससे ट्रैफिकर पकड़ा जा सके तथा बच्चों को बचाया जा सके. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-yadav-samanya-samiti-protested-against-demolition-of-slum-and-khatal/">आदित्यपुर

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भटके हुए बच्चों को पुनर्वास जरूरी : श्रीप्रिया

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alt="" width="360" height="180" /> कार्यशाला को संबोधित करते हुए जमशेदपुर सिविल कोर्ट की प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी श्रीप्रिया ने कहा कि अशिक्षा एवं गरीबी का फायदा उठाकर झारखंड के अलग-अलग क्षेत्र से बच्चों की तस्करी की जाती हैं. इसके लिए ऐसे वर्ग को जागरूक करने की जरूरत है. झालसा (झारखंड लिगल सर्विसेज ऑथोरिटी) ने ऐसे बच्चों के पुनर्वास के लिए मिशन वात्सल्य शुरु किया है. इसके तहत उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाना जरूरी हैं. इस कार्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक सेतू का काम करेगा. उन्होंने आरपीएफ के जवानों से अपील की कि अगर ऐसे मामले प्रकाश में आएं तो निःसंदेह वे डालसा के डालसा के सचिव अथवा पीएलवी को सूचित करने के साथ-साथ उनकी मदद लें. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-kudmi-culture-development-committee-organized-blood-donation-camp-in-mem-club/">चाकुलिया

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अब तक 270 बच्चों का किया गया रेस्क्यू

आरपीएफ के असिस्टेंट सिक्युरिटी कमिश्नर केसी नायक ने बताया कि मानव तस्करी रोकने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे के चारो डिविजन में ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन किया गया है. अब तक उक्त यूनिट की ओर से 270 बच्चों का रेस्क्यू किया जा चुका है. जिसमें 120 बच्चों का रेस्क्यू इस वर्ष किया गया है. उन्होंने कहा कि आरपीएफ के सभी अधिकारी एवं जवान ट्रैफिकिंग को लेकर हमेशा सजग रहते हैं. हालांकि छोटे बच्चों को बरामद करने के बाद उन्हें रखने एवं सौंपने में दिक्कत आती हैं. जिसे चाईल्ड लाईन के सहयोग से सुलझाया जाता हैं. हालांकि सभी स्टेशनों में चाईल्ड लाईन की शाखा नहीं हैं. जिसे बढ़ाए जाने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-the-youth-of-dangardih-who-went-to-bathe-in-satnala-dam-died-due-to-drowning/">चांडिल

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सवालों का न्यायिक पदाधिकारियों ने दिया जवाब

कार्यशाला के दौरान आरपीएफ के अधिकारियों एवं जवानों ने न्यायिक दंडाधिकारियों से ट्रैफिकिंग के मामलों में रेस्क्यू किए जाने के दौरान आने वाली परेशानियों से अवगत कराया. जिसका दोनों न्यायिक दंडाधिकारियों ने समाधान किया. काम की तलाश में बाहर जाने वाले बच्चों की सत्यता जांच के लिए परिजनों से संपर्क स्थआपित करने, स्थानीय स्तर पर छानबीन में पीएलवी की मदद लेने की अपील की. जिससे घर से भागकर अथवा भगाकर ले जाया जा रहा बच्चा सुरक्षित घर लौट सके. कार्यक्रम में आरपीएफ प्रभारी एसके तिवारी, सब इंस्पेक्टर अंजुम निशा, पीएलवी अरूण रजक, नागेन्द्र कुमार, सीमा कुमारी, सुनीता कुमारी आदि मौजूद थे. [wpse_comments_template]

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