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भटके हुए बच्चों को पुनर्वास जरूरी : श्रीप्रिया
alt="" width="360" height="180" /> कार्यशाला को संबोधित करते हुए जमशेदपुर सिविल कोर्ट की प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी श्रीप्रिया ने कहा कि अशिक्षा एवं गरीबी का फायदा उठाकर झारखंड के अलग-अलग क्षेत्र से बच्चों की तस्करी की जाती हैं. इसके लिए ऐसे वर्ग को जागरूक करने की जरूरत है. झालसा (झारखंड लिगल सर्विसेज ऑथोरिटी) ने ऐसे बच्चों के पुनर्वास के लिए मिशन वात्सल्य शुरु किया है. इसके तहत उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाना जरूरी हैं. इस कार्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकार एक सेतू का काम करेगा. उन्होंने आरपीएफ के जवानों से अपील की कि अगर ऐसे मामले प्रकाश में आएं तो निःसंदेह वे डालसा के डालसा के सचिव अथवा पीएलवी को सूचित करने के साथ-साथ उनकी मदद लें. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-kudmi-culture-development-committee-organized-blood-donation-camp-in-mem-club/">चाकुलिया
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अब तक 270 बच्चों का किया गया रेस्क्यू
आरपीएफ के असिस्टेंट सिक्युरिटी कमिश्नर केसी नायक ने बताया कि मानव तस्करी रोकने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे के चारो डिविजन में ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन किया गया है. अब तक उक्त यूनिट की ओर से 270 बच्चों का रेस्क्यू किया जा चुका है. जिसमें 120 बच्चों का रेस्क्यू इस वर्ष किया गया है. उन्होंने कहा कि आरपीएफ के सभी अधिकारी एवं जवान ट्रैफिकिंग को लेकर हमेशा सजग रहते हैं. हालांकि छोटे बच्चों को बरामद करने के बाद उन्हें रखने एवं सौंपने में दिक्कत आती हैं. जिसे चाईल्ड लाईन के सहयोग से सुलझाया जाता हैं. हालांकि सभी स्टेशनों में चाईल्ड लाईन की शाखा नहीं हैं. जिसे बढ़ाए जाने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-the-youth-of-dangardih-who-went-to-bathe-in-satnala-dam-died-due-to-drowning/">चांडिल: सतनाला डैम में नहाने गए डांगरडीह के युवक डूबने से मौत

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