: रिजेक्ट भवन में चल रहा है साकची महिला थाना
क्या है मांगें
सुनीता खाखा और अंकिता सिंह को और उनके परिवार को न्याय देने, दोनों के अपराधियों सीमा पात्रा और शाहरुख हुसैन को कड़ी से कड़ी सजा देने, दोनों ही आश्रित परिवारों को मुआवजा के रूप में एक-एक करोड़ रुपये देने की मांग की गयी. आदिवासी गांव समाज में आज भी जनतंत्र और संविधान, कानून, मानव अधिकार लागू नहीं है और इसलिए गांव में अनेक प्रकार की समस्याओं के बीच आदिवासी महिलाओं के साथ बहुत अन्याय अत्याचार शोषण होता रहा है. उसके लिए राष्ट्रीय महिला आयोग एक विशेष कार्यदल का गठन करे. जो ख़ासकर झारखंड, ओडिशा, बंगाल, असम और बिहार राज्यों में जाकर वस्तुस्थिति की जानकारी खुद ले और उसके समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई करे. आदिवासी समाज में डायन नहीं है, लेकिन डायन बनानेवाले आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम के जो अगुआ है. अधिकांश प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष इसको सहयोग करते दिखाई पड़ते हैं. इसको रोकने की जगह या तो मौन रहते हैं या अप्रत्यक्ष रूप से इस को समर्थन करते हैं. इसको सुधार करने में आयोग से सहयोग करने की मांग की गयी.कार्रवाई करने का मिला आश्वासन
सभी मांगों को सुनने के बाद उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया. इसके अलावा उनको सिदो मुर्मू के नेतृत्व में हुए संताल बिद्रोह (संथाल हूल) के बारे में जानकारी दी गई. सिदो मुर्मू का फोटो फ्रेम उनको दिया गया. उसी प्रकार सेंगेल पुस्तक में भारत के राष्ट्रपति के नाम जो पत्र लिखा गया है. जानकारी दी गई. इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/babulal-marandi-stopped-the-work-of-ranchi-smart-city-said-first-rehabilitation-then-the-administration-should-run-bulldozers-on-the-houses/">रांचीस्मार्ट सिटी के काम को बाबूलाल मरांडी ने रुकवाया, कहा- पहले पुनर्वास, फिर घरों पर बुलडोजर चलाये प्रशासन [wpse_comments_template]

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