उन्माद की राजनीति किसी भी देश को श्रीलंका बना दे सकती है
आदिवासी सशक्तिकरण का कार्य कर रही एएसए
आदिवासी सेंगेल अभियान की मांग है कि भारत सरकार आदिवासियों को उनकी धार्मिक पहचान "सरना धर्म कोड" प्रदान कझारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम के आदिवासी बहुल जिलों में आदिवासी सशक्तिकरण का कार्य करती है. आदिवासी सेंगेल अभियान की मांग है कि भारत सरकार आदिवासियों को उनकी धार्मिक पहचान "सरना धर्म कोड" प्रदान कर जनगणना में शामिल करें. चूंकि अधिकांश आदिवासी हिंदू, मुसलमान, ईसाई आदि नहीं हैं. प्रकृति पूजक हैं. आदिवासी अपने-अपने राज्यों में अलग-अलग नामों से अपनी धार्मिक पहचान को बताते हैं. परंतु 2011 की जनगणना में सर्वाधिक संख्या लगभग 50 लाख आदिवासियों ने अन्य अन्य या any other column में सरना धर्म लिखाया था. अतः आदिवासी सेंगेल अभियान की मांग है भारत सरकार रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के मार्फत सरना धर्म को अविलंब मान्यता प्रदान कर जनगणना में शामिल करें.राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को सौंपेंगे मांगपत्र
सरना धर्म कोड की मान्यता मांग के लिए कुछ हजार आदिवासी 30 जून 2022 को जंतर मंतर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन अनुमति के आकांक्षी हैं. यदि किसी विशेष कारण से अनुमति नहीं दी जा सकती है तो कृपया 10 जून 2022 तक हमें तत्सम्बन्धी जरूरी सूचना प्रदान की जाए. आशा है हमें 30 जून 2022 को जंतर मंतर, दिल्ली में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने की अनुमति के साथ दिल्ली पुलिस प्रशासन का सहयोग प्राप्त होगा. आदिवासी सेंगेल अभियान का एक प्रतिनिधिमंडल 30 जून 2022 को धरना-प्रदर्शन के साथ देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिलकर अपना मांगपत्र सौंपेगा. इसे भी पढ़ें : महंगाई">https://lagatar.in/bjp-broke-its-back-by-increasing-inflation-now-it-is-deviating-loudspeakers-hanuman-chalisa-sudivya-kumar/">महंगाईबढ़ाकर BJP ने तोड़ी कमर, अब लाउडस्पीकर व हनुमान चालीसा से भटका रही : सुदिव्य कुमार [wpse_comments_template]

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