Jamshedpur (Anand Mishra) : कोल्हान विश्वविद्यालय और इसके अंगीभूत कॉलेजों में वित्तीय संकट की स्थिति उत्पन्न होने लगी है. इसे लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन गंभीर है. साथ ही कालेजों को आगाह कराते हुए खर्च को नियंत्रित करने का निर्देश देने का निर्णय लिया है. इस संबंध में विश्वविद्यालय जल्द ही कॉलेजों को दिशा-निर्देश जारी करेगा, ताकि वित्तीय अनुशासन बरकरार रहे. खाता बही खर्च का ब्यौरा आदि सब कुछ अपडेट रखना होगा. इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की भी विशेष नजर रहेगी. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-examination-will-be-held-for-admission-in-kolhan-universitys-free-coaching-center/">चाईबासा
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क्यों पड़ी जरूरत
जानकार बताते हैं कि पिछले 2 वर्ष के दौरान विश्वविद्यालय समेत कॉलेजों के आंतरिक स्रोत से प्राप्त आय की अपेक्षाकृत बचत नहीं हो पा रही है. यह राशि विश्वविद्यालय ए अकाउंट से खर्च होती है. इस अकाउंट में बचत कम है. जबकि वैसे शिक्षक जो सेवानिवृत्ति के बाद विश्वविद्यालय अथवा कॉलेजों में रखे गए हैं उन्हें आंतरिक स्रोत जाने के अकाउंट से ही भुगतान किया जाता है. इसके अलावा इस अकाउंट से अन्य खर्च भी किए जाते हैं. इसे भी पढ़ें: चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-student-representatives-demand-implementation-of-biometrics-system-in-kolhan-university/">चाईबासा: छात्र प्रतिनिधियों ने की कोल्हान विवि में बायोमैट्रिक्स सिस्टम लागू किये जाने की मांग
2 वर्ष में बढ़ा है खर्च
जानकारी के अनुसार कालेजों और विश्वविद्यालय के आंतरिक स्रोत से आय में खासी वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन खर्च बढ़ा है. सिर्फ सेवानिवृत्त शिक्षकों के मानदेय की बात की जाए, तो इसके लिए आंतरिक स्रोत के अलावा अन्य कोई मदद नहीं है. जबकि अस्थाई एवं घंटी आधारित शिक्षकों को भुगतान के लिए सरकार की ओर से आवंटन प्राप्त होता है. इसे भी पढ़ें : खाद्य">https://lagatar.in/jharkhand-has-not-sent-any-proposal-to-the-center-for-food-processing-industry-in-three-years/">खाद्यप्रसंस्करण उद्योग के लिए झारखंड ने तीन साल में केंद्र को नहीं भेजा कोई प्रस्ताव
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