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कर का दायरा बड़ा करना चाहिए : सुरेश सोंथालिया
[caption id="attachment_348435" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> सुरेश सोंथालिया.[/caption] वहीं कैट राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोंथालिया ने कहा कि निश्चित रूप से कर संग्रह में वृद्धि होनी चाहिए. लेकिन आम लोगों की आवश्यक वस्तुओं को कर स्लैब में लाने के बजाय कर का दायरा बड़ा करना चाहिए. जिससे जो लोग अभी तक कर के दायरे में नहीं आये हैं, उनको कर के दायरे में लाया जाए.जिससे केंद्र एवं राज्य सरकारों का राजस्व बढ़ेगा.उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार बड़े ब्रांड वाले खाद्यान्न को कर के दायरे में लाया गया.उन्होंने कहा की सरकार की मंशा आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को कर से बाहर रख उनके दाम सदैव कम रखने की रही है.अब ऐसा क्या हो गया जिससे इन बुनियादी वस्तुओं पर कर लगाना पड़ रहा है.सोंथालिया ने इन वस्तुओं को 5% कर दायरे में रखने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में सभी बड़े ब्रांड की कंपनियां देश की आबादी के केवल 15 प्रतिशत लोगों की ही जरूरतों की पूर्ति करते हैं.जबकि बड़े स्तर पर देश के सभी राज्यों में छोटे निर्माता जिनका अपना लोकल लेबल होता है. देश की 85 प्रतिशत आबादी की मांग को पूरा करते हैं. ऐसे में इन वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में आने से जहां छोटे निर्माताओं एवं व्यापारियों पर कर पालन का बोझ बढ़ेगा.वहीँ आम लोगों को मिलने वाली बुनियादी वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी. [wpse_comments_template]

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