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जमशेदपुर : अंतरिक्ष में प्रयोग के लायक संस्कृत ही एकमात्र भाषा, इसलिए उपयोग कर रहा नसा : डॉ अशोक झा

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Jamshedpur (Anand Mishra) : जमशेदपुर के साकची स्थित द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेन में संस्कृत भारती की ओर से शनिवार को जनपद सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में विद्यालय स्तरीय संस्कृत समूह गान प्रतियोगिता एवं संस्कृत भाषा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि एलबीएसएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ अशोक कुमार झा, विशिष्ट अतिथि ग्रेजुएट कॉलेज की प्राचार्य डॉ वीणा प्रियदर्शी, संस्कृत भारती के महानगर अध्यक्ष डॉ भोलेन्द्र पाण्डेय और विभाग संयोजक मनोज दूबे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं मां सरस्वती की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का उदघाटन किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ अशोक झा ने कहा कि मैक्समूलर जैसे विदेशी विद्वानों ने संस्कृत का अध्ययन किया और उसका अनुवाद किया. इस कारण उसे पढ़ने वाले भारतीय संस्कृति को कभी भी ठीक से नहीं समझ सकते, बल्कि उसके कारण अर्थ का अनर्थ हो रहा है. संस्कृत भाषा में एक अरब से भी अधिक शब्द हैं, जो दूसरी किसी भाषा में नहीं है. एक शब्द के 50 से अधिक पर्यायवाची शब्द हैं. हम अपने ज्ञान के कारण आर्थिक रूप से भी बहुत आगे थे. एक समय विश्व की अर्थव्यवस्था में हमारा 27 प्रतिशत योगदान था. उन्होंने कहा कि यहां जो श्लोक प्रदर्शित किए गए हैं, यदि ऐसे श्लोक विद्यालयों और घर में सिखाया जाए तो लोग निश्चित ही नैतिक होंगे. यहां लिखा है कि जो केवल धन चाहते हैं वे अधम हैं. जो धन और सम्मान चाहते हैं वे मध्यम श्रेणी में हैं. ऊंचे विचार के लोगों के लिए सम्मान सर्वोपरि है. उन्होंने कहा कि नासा में संस्कृत भाषा का बहुत उपयोग हो रहा है, क्योंकि अन्तरिक्ष में प्रयोग करने लायक यही एकमात्र भाषा है. संस्कृत भारती और इसके कार्यकर्ता एक श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं. जैसे जांबवन्त ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का स्मरण कराया था उसी प्रकार यदि हमारे युवाओं को संस्कृत के माध्यम से उनकी शक्ति का अनुभव कराया गया, तो हम पुनः विश्व में अग्रणी देश बन सकते. इसे भी पढ़ें : पूर्व">https://lagatar.in/remand-period-of-former-cm-hemant-soren-begins-team-reaches-ed-office-from-jail/">पूर्व

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संस्कृत भाषा जानना आवश्यक : डॉ वीणा प्रियदर्शी

विशिष्ट अतिथि द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेन की प्राचार्य डॉ वीणा प्रियदर्शी ने कहा कि मैं संस्कृत भारती के का यह आयोजन सराहनीय है. हमारा संपूर्ण प्राचीन ज्ञान-विज्ञान संस्कृत भाषा में लिपिबद्ध है. हम दूसरी भाषा के अनुवाद को पढ़कर मूल बात को नहीं समझ सकते. इसलिए उस उन्नत प्राचीन ज्ञान को फिर से उपयोग में लाने के लिए संस्कृत भाषा जानना आवश्यक है. संस्कृत भाषा का व्याकरण सबसे व्यवस्थित है. इससे पूर्व सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बागबेड़ा की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की. विभाग संयोजक मनोज दूबे ने अतिथियों का स्वागत किया एवं परिचय कराया. अध्यक्षीय भाषण करते हुए डॉ भोलेन्द्र पाण्डेय ने संस्कृत भाषा की महत्ता को प्रतिपादित किया. उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व के अग्रणी देश भी अपने यहां संस्कृत भाषा पढ़ाते हैं. वहां कई संस्कृत विश्वविद्यालय हैं. उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को फिर से प्रचारित करने के लिए संस्कृत भारती संपूर्ण देश में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रयास कर रही है. इसे भी पढ़ें : ED">https://lagatar.in/ed-arrested-bhanu-a-light-employee-of-badgai-hemant-and-bhanu-may-be-interrogated-face-to-face/">ED

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समूह गान में विद्या भारती चिन्मय विद्यालय प्रथम

सम्मेलन के दूसरे चरण में विद्यालय स्तरीय संस्कृत समूह गान प्रतियोगिता हुई. इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज की संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ लाडली कुमारी, डॉ भोलेन्द्र पाण्डेय एवं मनोज दूबे थे. प्रतियोगिता में 11 विद्यालयों से कुल 12 टीमों ने हिस्सा लिया. प्रत्येक टीम में पांच विद्यार्थी शामिल थे. प्रतियोगिता में प्रथम स्थान विद्या भारती चिन्मय विद्यालय टेल्को, द्वितीय स्थान सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, शास्त्रीनगर कदमा और तृतीय स्थान राम कृष्ण मिशन लेडी इन्दर सिंह हाई स्कूल, टेल्को ने प्राप्त किया. इसके अतिरिक्त श्री सकची गुजराती इंग्लिश हाई स्कूल, एनएमएल केरला पब्लिक स्कूल एवं हिन्दुस्तान मित्र मंडल हाई स्कूल की टीम को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया. शिक्षक-शिक्षिकाओं को संस्कृत पुस्तकें और सीडी प्रदान किया गया. कार्यक्रम का संचालन संस्कृत भाषा में श्रीमती स्वर्णलता झा ने किया. सम्मेलन के आयोजन में कॉलेज प्रशासन के साथ ही संस्कृत भारती के मंत्री अखिलेश झा, विशाल गौरव, जितेन्द्र कुमार शुक्ल, अच्युतानंद झा, अश्विनी कुमार शुक्ल, अविनाश मिश्र, कुणाल कुमार वर्मा, ललन कुमार एवं रूपम झा की सराहनीय भूमिका रही. [wpse_comments_template]

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