Jamshedpur (Dharmendra Kumar): पौधों के औषधीय गुण के संबंध में जागरुकता बढ़ाने और उनके संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टाटा स्टील माइनिंग ने मंगलवार को सुकिंदा माइंस में ग्रीन थेरेपी कार्यशाला का आयोजन किया. इस अवसर पर पंकज कुमार सतीजा ने कहा कि इस तरह के विचार-विमर्श का उद्देश्य सदियों पुरानी परंपराओं को संरक्षित करने और पौधों के औषधीय गुण के संबंध में अपने ज्ञान को बढ़ाने में हमारी मदद करना है. यह कार्यक्रम जैव विविधता की दिशा में अपना योगदान देने के लिए शुरू की गई सतत प्रयासों की श्रृंखला के एक कड़ी है. उन्होंने कहा कि टाटा स्टील माइनिंग अपने कार्यस्थल क्षेत्र के आसपास रहने वाले स्वदेशी लोगों की समृद्ध विरासत और संस्कृति के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है. यह स्थानीय आयुर्वेदिक चिकित्सकों, या वैद्यों के औषधीय ज्ञान को समेटने के लिए कंपनी द्वारा की गई प्रयासों में से एक है. [caption id="attachment_337539" align="aligncenter" width="600"]

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alt="" width="600" height="397" /> टाटा स्टील माइनिंग द्वारा आयोजित ग्रीन थेरेपी कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागी[/caption]
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वहीं संजय कुमार स्वैन, वन अधिकारी ने कहा कि "इस तरह के आयोजन हमारे पारंपरिक प्राकृतिक चिकित्सा विज्ञान संबंधी औषधीय प्रथाओं को संरक्षित करने में टाटा स्टील माइनिंग के प्रयासों का प्रमाण है. मैं आधुनिक विज्ञान को पारंपरिक ज्ञान के साथ मिलाने में उनके योगदान के लिए चिकित्सकों को बधाई देता हूं. ग्रीन थेरेपी कार्यशाला में श्री श्री विश्वविद्यालय, कटक में आयुर्वेद के प्रोफेसर डॉ. संजीब दास के साथ ओडिशा के औषधीय पौधों के 50 प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने भाग लिया. दिन भर चले इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया. कार्यशाला में मुख्य रुप से सौभाग्य कुमार साहू, अतिरिक्त वन संरक्षक, कटक वन प्रभाग, सुशांत कुमार मिश्रा, वरिष्ठ महाप्रबंधक, खनन, टाटा स्टील माइनिंग शामिल हुए. [wpse_comments_template]
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