Jamshedpur (Mujtaba Haider Rizvi) : टाटा स्टील माइनिंग लिमिटेड (टीएसएमएल) ने अपने संचालन को वाटर न्यूट्रल बनाने की कवायद शुरू की है. यानी टाटा स्टील माइनिंग लिमिटेड के संचालन में ग्राउंड वाटर की निकासी को शून्य करने की योजना है. फैसला लिया गया है कि साल 2030 तक सतही जल की खपत को 30% तक समेट दिया जाए. क्योंकि कटक में इसके फेरोक्रोम संयंत्र के लिए पानी की खपत में 0. 50 क्यूसेक की कमी आई है. संचालन को वाटर न्यूट्रल बनाने के लिए कंपनी ने द एनर्जी एंड रिसोर्सेस (टेरी) के साथ सहभागिता की है. टेरी नई दिल्ली का शोध संस्थान है, जो ऊर्जा पर्यावरण और सस्टेनेबल विकास के क्षेत्र में महारत रखता है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-mission-awareness-organized-pratibha-samman/">जमशेदपुर
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जल प्रबंधन के लिए तैयार होगा डैशबोर्ड
जल प्रबंधन के लिए डिजिटल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा. इसके लिए टाटा स्टील ने फ्लक्सजेन इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के साथ साझेदारी की है. संचालन को वाटर न्यूट्रल बनाने की पहल. कई पहलुओं पर केंद्रित है. इसमें जल के उपयोग में संतुलन, जल की गुणवत्ता की रूपरेखा, पानी के नुकसान और रिसाव की पहचान और बड़े पैमाने पर वाटर का ऑडिट शामिल होगा. पानी को रिसाइकल कर इसका दोबारा उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा और कुशल जल प्रबंधन के जरिए कंपनी अपनी अलग पहचान बनाएगी. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-principal-of-womens-college-misbehaved-with-student-union-representatives-union-warned-of-agitation/">चाईबासा: महिला कॉलेज की प्राचार्या ने छात्र संघ प्रतिनिधियों से किया दुर्व्यवहार, संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
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