Jamshedpur (Dharmendra Kumar) : टाटा स्टील और जर्मनी के एसएमएस ग्रुप ने स्टील मेकिंग प्रक्रिया के
डीकार्बोनाइजेशन पर सहयोग के लिए समझौता (एमओयू) किया
है. एमओयू के तहत कंपनियां आगे चलकर एसएमएस ग्रुप द्वारा विकसित
ईजीमेल्ट प्रौद्योगिकी के संयुक्त औद्योगिक प्रदर्शन के संचालन के लिए तकनीकी चर्चा और कार्रवाई शुरू
करेगी. यह परीक्षण टाटा स्टील के जमशेदपुर संयंत्र में ई-ब्लास्ट फर्नेस में किया
जाएगा. जिसका उद्देश्य ब्लास्ट फर्नेस के बेसलाइन ऑपरेशन से
CO2 उत्सर्जन को
50% से अधिक कम करना
है. ईजीमेल्ट (इलेक्ट्रिक-असिस्टेड
सिनगैस स्मेल्टर) तकनीक एक अत्याधुनिक
आयरनमेकिंग समाधान है जिसे
डीकार्बोनाइजेशन में तेजी लाने के लिए मौजूदा एकीकृत इस्पात संयंत्रों में लागू किया जा सकता
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: मन का मिलन पखवाड़ा में 50 से अधिक आवेदन हुए प्राप्त समेत 2 खबरें टाटा स्टील पर डीकार्बोनाइजेशन नेतृत्व की बड़ी जिम्मेदारी है
इस अवसर पर टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी
नरेंद्रन ने कहा कि टाटा स्टील सक्रिय रूप से ग्रीन स्टील उत्पादन में परिवर्तन की सुविधा के लिए समाधानों की तलाश कर रही
है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे
बड़ा इस्पात उत्पादक होने के नाते टाटा स्टील जैसे
बड़े निर्माताओं पर देश की
डीकार्बोनाइजेशन यात्रा का नेतृत्व करने के लिए एक
बड़ी जिम्मेदारी
है. हमें एसएमएस ग्रुप के साथ अपनी साझेदारी की फिर से पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है और हम सार्थक एवं सुसंगत तरीके से हमारे कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए बेहतर
प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं तक पहुंच बनाने के लिए गहन सहयोग के साथ इस साझेदारी को आगे
बढ़ाने का इरादा रखते
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: विश्व रक्तदाता दिवस पर मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज में रक्तदान शिविर आयोजित टाटा स्टील के साथ साझेदारी पर गर्व है - एसएमएस ग्रुप
एसएमएस ग्रुप के सीईओ
बुर्खार्ड डाहमेन ने कहा कि हमें टाटा स्टील जैसे बड़े स्टील निर्माता के साथ साझेदारी पर बहुत गर्व है और हम भविष्य में अपनी बातचीत के साथ-साथ अपनी
ईजीमेल्ट तकनीक के लिए पहला संयुक्त संदर्भ प्राप्त करने की संभावना
है. यह दुनिया भर में मौजूदा ब्लास्ट फर्नेस संयंत्रों के
डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और इस प्रकार इस्पात निर्माण के वैश्विक रूपांतरण में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
होगा. टाटा स्टील अपने जमशेदपुर प्लांट के लिए प्रतिष्ठित
``रिस्पॉन्सिबल स्टील
सर्टिफिकेशन`` प्राप्त करने वाली देश की पहली स्टील निर्माता कंपनी है, जिसने भारत को वैश्विक
डीकार्बोनाइजेशन और
सस्टेनेबिलिटी मानचित्र पर ला
खड़ा किया
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