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जमशेदपुर: जिले के पहले बच्चे को पीएम केयर से जोड़ा गया,  उपायुक्त ने बच्चे के साथ खुलवाया ज्वाइंट अकाउंट

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Sunil Pandey Jamshedpur :  कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर से मदद मिलेगी. पूर्वी सिंहभूम जिले में उक्त श्रेणी का पहला बच्चा मिला है. जिसके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है. उक्त बच्चे को भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से जोड़ा गया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत चिन्हित बच्चे के साथ जिले के उपायुक्त का ज्वाइंट अकाउंट बिष्टुपुर स्थित मुख्य पोस्ट ऑफिस में खोला गया है. बच्चे के बालिग होने के बाद उसे एक मुश्त 10 लाख रुपये की सहायता भारत सरकार से प्राप्त होगी. इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर:">https://lagatar.in/jamshedpur-shift-shopkeepers-in-ambagan-threaten-to-set-up-shop-again-in-sakchi-protest-at-dc-office/">जमशेदपुर:

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आठ बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ा गया

इस संबंध में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी डॉ. चंचल कुमारी ने बताया कि कोविड-19 के दौरान 11 मार्च 2020 से अब तक वैसे बच्चे, जिन्होंने अपने माता-पिता (इसमें गोद लिए गए बच्चे के अभिभावक, सरवाइविंग पैरेंट्स भी शामिल हैं.)  को खोया है, की देखभाल एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से प्राप्त हुआ है. ऐसे बच्चों का पता लगाने के लिये जिले में सर्वे कराया गया. जिसमें पीएम केयर के तहत सभी अर्हताएं मानगो के एक किशोर ने पूरी की. उक्त किशोर के माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है. पिता का निधन काफी पहले हो गया था. जबिक माता का निधन कोरोना से हो गया. जिससे वह पूरी तरह अनाथ हो गया. वैसे जिले में ऐसे 9 बच्चे चिन्हित किए गए थे, जिनके माता-पिता दोनों नहीं है. लेकिन कोविड-19 से किसी की मौत नहीं हुई थी. जिसके कारण उक्त बच्चों को पीएम केयर की बजाय स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ा गया.

अनाथ बच्चों को 24 घंटे के भीतर सीडब्ल्यूसी अथवा डीसीपीयू के समक्ष पेश करना होगा

जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि ऐसे बच्चों का पंजीकरण मंत्रालय की ओर से जारी किए गए वेब पोर्टल pmcaresforchildren.in पर करना है. सभी जिलाधिकारियों को स्कीम का लाभ लेने की पात्रता रखने वाले बच्चों की सूची पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया है. स्कीम के तहत ऐसे बच्चों का पता लगने के बाद उन्हें 24 घंटे में सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति), डीसीपीयू (जिला बाल संरक्षण इकाई) के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है. इस मामले में सीडब्ल्यूसी या डीसीपीयू की अनुशंसा भी जरूरी है. किसी लाभार्थी के मामले में अगर स्पष्ट अनुशंसा नहीं की गई है तो इसका कारण स्पष्ट करना होगा. उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी को यह अधिकार होगा कि वे सीडब्ल्यूसी या डीसीपीयू की अनुशंसा में बदलाव या संशोधन कर सकते हैं.

स्वराज पोर्टल पर 124 बच्चों का डाटा अपलोड किया गया

जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि कोरोना काल में अभिभावकों को खोने वाले बच्चों का सर्वे कराया गया. जिसमें वित्तीय वर्ष 2020-2021 में 84 और वित्तीय वर्ष 2021-2022 (अब तक) में 87 बच्चे शामिल हैं. इसमें 149 बच्चों ने अपने माता या पिता में से किसी एक को खोया है. इनमें 124 बच्चों की सूची राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआऱ) के स्वराज पोर्टल पर अपलोड की गई है, जिसमें 76 बच्चे एकल अभिभावक वाले हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना अथवा अन्य कारणों से भी किसी बच्चे के अभिभावक की मौत होती है, तो उक्त बच्चे को स्पॉन्सरशीप योजना का लाभ मिलेगा.

बच्चों की शिक्षा का खर्च भी सरकार वहन करेगी

उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत 10 वर्ष से नीचे की आयु के बच्चों का बैंक खाता किसी एक अभिभावक से साथ संयुक्त रूप से खुला होना चाहिए. जबकि 10 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों का एकल खाता बैंक में होना चाहिए. ऐसे बच्चों के खाते में प्रत्येक माह 2000 रुपये उनकी परवरिश और देखभाल के लिए भेजे जाएंगे. उन बच्चों की शिक्षा का खर्च भी सरकार वहन करेगी. निजी स्कूलों में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों का एक वर्ष का फीस माफ कराया गया है. साथ ही बच्चे और उसके अभिभावक को आयुष्मान कार्ड,  राशन कार्ड और पेंशन योजना से जोड़ा जाता है.

योजना का लाभ लेने के जरूरी दस्तावेज

डेथ सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, बीपीएल या राशन कार्ड, आधार कार्ड, कोरोना से माता या पिता के निधन होने का मेडिकल पेपर, लाभार्थी का फोटो. इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर">https://lagatar.in/aslom-jamshedpur-the-missing-accountant-from-mango-kunwar-basti-is-not-known-even-after-five-days-complaint-to-city-sp/">जमशेदपुर

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