Jamshedpur (Dharmendra Kumar) : करीम सिटी कॉलेज के मास कम्युनिकेशन विभाग द्वारा रेडियो के प्रसारण के 100 वर्ष पूरे होने पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सोमवार को तीसरे और अंतिम दिन संपन्न
हुआ. सोमवार को आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत विषय विशेषज्ञ के विशेष सत्र से
हुई. जिसमें तीन विशेष वक्ता आमंत्रित
थे. सखी सहेली के नाम से मशहूर मुंबई से विविध भारती की प्रसिद्ध प्रस्तोता ममता सिंह तथा देश के जाने माने कार्यक्रम प्रस्तोता एवं सिने लेखक यूनुस खान तथा कतर से लेखिका एवं शिक्षाविद् शालिनी वर्मा मौजूद
रहीं. ममता सिंह ने नारी सशक्तीकरण पर रेडियो की भूमिका पर अपनी बात
रखी. कई जीवंत उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि किस प्रकार रेडियो ने नारियों में आधुनिक चेतना जागृत की
है. चाहे वह ग्रामीण महिला हो या शहरी महिला के साथ रेडियो अपने तमाम कार्यक्रमों के माध्यम से हमेशा
खड़ा रहा
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: पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप, एसएसपी से शिकायत श्रोताओं को याद आए रेडियो के पुराने दिन
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alt="" width="600" height="400" /> मंच पर उपस्थित अतिथि.[/caption] यूनुस खान ने रेडियो में बदलते प्रस्तुतीकरण के तरीके पर रोमांचक तरीके से प्रस्तुति
दी. यूनुस खान सिलसिलेवार तरीके से 100 वर्षों में कार्यक्रम प्रस्तुतीकरण में आए परिवर्तनों के विषय में विस्तार से
बताया. इससे शोधार्थी बेहद लाभान्वित
हुए. श्रोताओं को रेडियो के पुराने दिन याद आ
गए. शालिनी वर्मा ने तमाम प्रवासी भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हुए बताया कि किस प्रकार विदेशों में बसे भारतीयों को रेडियो अपनी भाषा और संस्कृति से
जोड़े रखता
है. शालिनी ने बताया कि कतर में कितने भारतीय रहते हैं जो विभिन्न भाषाओं के
हैं. लेकिन वहां हिंदी का उपयोग करते हैं और रेडियो की वजह से अपने आप को देश के नजदीक समझते
हैं. उन्होंने विशेष तौर पर कोरोना काल का उल्लेख करते हुए कहा कि वह रेडियो ही था जो सही और सलीकेदार तरीके से जानकारी दे रहा
था. सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजिका डॉक्टर नेहा तिवारी ने वक्ताओं का परिचय
करवाया. स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रियाज ने
दी. इसे भी पढ़ें : जामताड़ा">https://lagatar.in/jamtara-group-of-29-pilgrims-left-for-dwarka-and-somnath/">जामताड़ा
: 29 तीर्थ यात्रियों का जत्था द्वारिका व सोमनाथ के लिए रवाना बिग एफएम के शादाब उमर हाशमी ऑनलाइन हुए शामिल
आज कार्यक्रम के अंतिम सत्र में दोहा, लंदन, अमेरिका, दिल्ली व मलेशिया से ऑनलाइन
जुड़कर शोधार्थियों ने अपने पत्र प्रस्तुत
किए. इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. संजीव
भनावत ने की और
मॉडरेशन डॉ. रश्मि कुमारी ने
की. सभी शोधार्थियों की प्रस्तुति को सराहना
मिली. कम्युनिकेशन टुडे के संपादक एवं राजस्थान यूनिवर्सिटी के मास कम्युनिकेशन के संस्थापक व सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. संजीव
भनावत को ऑनलाइन आमंत्रित किया गया
था. उन्होंने विस्तार से रेडियो के जनसंचार माध्यम के रूप में विभिन्न आयामों और भविष्य की दशा दिशा पर अपने विचार
रखे. विशिष्ट वक्ता के रूप में बिग एफएम के क्लस्टर हेड शादाब उमर हाशमी भी ऑनलाइन मौजूद
रहे. हाशमी ने एफएम प्रसारण की चुनौतियों के विषय में
बताया. शहर के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं रेडियो कलाकार डॉ.
सी. भास्कर राव भी उपस्थित
रहे. करीम सिटी कॉलेज के डॉ. मोहम्मद जकरिया खास तौर पर उपस्थित
रहे. करीम सिटी कॉलेज के मास कम्युनिकेशन विभाग के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वेबसाइट लांच की गई. [wpse_comments_template]
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