: दिव्यांगों को बुलाकर खुद नदारद रहे सिविल सर्जन, नाराज लोगों ने किया प्रदर्शन जबकि अनुसूचित जनजातियों के पर्व-त्योवहार, सभ्यता-संस्कृति, भाषा वगैरह समान है. इसके बावजूद समाज को उचित पहचान एवं मान सम्मान नहीं मिला. उन्होंने प्रधानमंत्री से कुड़मी, कुड़माली एवं सरना के पुरातन इतिहास को देखते हुए उक्त समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की. प्रतिनिधिमंडल में प्रकाश महतो, निवारण महतो, उज्जवल महतो, नमिता महतो, क्रिटी महतो, असित करूवा, फूलचंद करूवा, विनय महतो, ललित मोहन महतो, धनंज्जय महतो, अनिल वरण महतो समेत काफी संख्या में महिलाएं शामिल थी. इससे पहले विगत 28 दिसंबर को समाज की ओर से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा गया था. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-results-of-various-cultural-competitions-organized-by-mataji-ashram-hata-announced/">जमशेदपुर
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कुड़मी समाज की प्रमुख मांगे
कुड़मी को जनजातीय समुदाय की श्रेणी में शामिल किया जाय, भारत की जनगणना में कुड़माली को भाषा एवं सरना को धर्म के रुप में मान्यता दी जाय, कुड़माली को आठवी अनुसूची में शामिल किया जाय, प्राथमिक से लेकर उच्च एवं उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों में त्रुटिपूर्ण कुरमाली को सुधार कर कुड़माली भाषा में पढ़ाई की जाय. कुड़माली एकेडमिक एवं कल्चरल बोर्ड का गठन किया जाए, प्रत्येक गांव में स्थित धार्मिक स्थल (जाहिराथान, सरनाथान, गोड़ाम थान) की घेराबंदी एवं सौंदर्यीकरण किया जाय साथ ही पारंपरिक ग्राम प्रधान एवं पुजारी की प्रतिनियुक्ति की जाय, चुआड़ विद्रोह के नायक शहीद रघुनाथ महतो, संताल हूल के चानकू महतो एवं झारखंड आंदोलनकारी शक्तिनाथ महतो, निर्मल महतो समेत अन्य महापुरूषों की जीवनी सरकारी पाठ्यक्रम में शामिल की जाय आदि मांगे शामिल हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-4-students-remained-absent-in-the-graduate-college-on-the-second-day-in-b-ed-second-semester-examination/">जमशेदपुर: बीएड द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में दूसरे दिन ग्रेजुएट कॉलेज में 4 विद्यार्थी रहे अनुपस्थित [wpse_comments_template]

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