Jamshedpur (Rohit Kumar) : चांडिल के डोबो पुल नामांकरण का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. 05 अप्रैल को ही चुआड़ सेना (कुड़मी समाज) की ओर से उक्त स्थल पर लगे बिरसा मुंडा के बोर्ड को हटाकर चुआड़ विद्रोह के नायक शहीद रघुनाथ महतो की प्रतिमा स्थापित कर दी गई थी. जानकारी मिलने पर रविवार को गुस्साए आदिवासी संगठन के लोग मौके पर पहुंचे और रघुनाथ महतो की प्रतिमा के पास बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित कर दी. प्रतिमा को स्थापित करने के बाद मांदर की थाप पर जमकर पारंपरिक नृत्य किया गया. इस दौरान चुआड़ सेना से कोई भी मौके पर मौजूद नहीं था. आदिवासी संगठन के दिनकर कच्छप ने बताया कि पुल निर्माण के बाद उक्त स्थल का नाम धरती आबा बिरसा मुंडा के नाम पर रखा गया था. बिरसा मुंडा को सारी दुनिया जानती है कि उन्होंने किस तरह अंग्रेजों को भगाने का काम किया था. अब चुआड़ सेना द्वारा उक्त स्थल पर रघुनाथ महतो की प्रतिमा स्थापित की जा रही है जो कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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: जलाडो ने गर्मी में पेयजल की किल्लत को देखते हुए नगर निगम से टैंकरों की संख्या बढ़ाने की रखी मांग बिरसा मुंडा की प्रतिमा हटाकर लगा दी थी रघुनाथ महतो की प्रतिमा
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alt="" width="600" height="400" /> पुल पर नाचते गाते आदिवासी समाज के लोग[/caption] बता दें कि 05 अप्रैल को अमर शहीद रघुनाथ महतो के समर्थकों ने धरती आबा भगवान बिरसा के बोर्ड को हटाकर वहां चुआड़ विद्रोह के नायक महान स्वाधीनता सेनानी शहीद रघुनाथ महतो की प्रतिमा स्थापित कर दी थी. जिसको लेकर भगवान बिरसा मुंडा के अनुयाई और शहीद रघुनाथ महतो के समर्थक आमने-सामने आ गए थे. काफी हो हंगामा के बाद प्रशासन ने किसी तरह मामले को शांत कराया था. रविवार को आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक हरवे- हथियार से लैस होकर उक्त स्थल पर पहुंचे और विधि- विधान के साथ धरती आबा भगवान बिरसा की प्रतिमा स्थापित की उसके बाद मांदर की थाप पर बीच सड़क पर पारंपरिक नृत्य किया. [wpse_comments_template]
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