Mujtaba Haidar Rizvi Jamshedpur: रानीकुदर व टुइलाडूंगरी में चार अवैध इमारतों का बिजली पानी का कनेक्शन काटा गया है. मंगलवार को यह कार्रवाई जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेनेसी) और जुस्को के अधिकारियों ने की है. लेकिन जेएनएसी के अधिकारियों को भवन मालिकों का नाम पता नहीं है. वह भवन मालिकों का नाम नहीं बता पा रहे कि किनके भवन में नक्शा विचलन था और किनके बिजली-पानी के कनेक्शन काटे गए हैं. इससे पूरी कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जेएनएसी कानून का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों और भवन मालिकों का नाम क्यों उजागर नहीं करना चाहती. इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-hearing-of-cable-company-in-nclt-court-on-may-25/">जमशेदपुर
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alt="" width="300" height="169" /> [caption id="attachment_316874" align="aligncenter" width="300"]
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alt="" width="300" height="169" /> टुइलाडूंगरी में बिजली का कनेक्शन काटते जेएनएसी व जुस्को के कर्मचारी.[/caption] जेएनएसी के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को चार अवैध व नक्शा विचलन वाली इमारतों का बिजली पानी का कनेक्शन काटा है. इनमें धतकीडीह में होल्डिंग संख्या 36 ए, रानी कुदर में होल्डिंग संख्या 3, गोलमुरी के टुइला डूंगरी में होल्डिंग संख्या 18 ए ब्लॉक और 16 बी ब्लॉक की इमारतों का कनेक्शन काटा गया है.
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इन चार इमारतों का कटा कनेक्शन
alt="" width="300" height="169" /> [caption id="attachment_316874" align="aligncenter" width="300"]
alt="" width="300" height="169" /> टुइलाडूंगरी में बिजली का कनेक्शन काटते जेएनएसी व जुस्को के कर्मचारी.[/caption] जेएनएसी के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को चार अवैध व नक्शा विचलन वाली इमारतों का बिजली पानी का कनेक्शन काटा है. इनमें धतकीडीह में होल्डिंग संख्या 36 ए, रानी कुदर में होल्डिंग संख्या 3, गोलमुरी के टुइला डूंगरी में होल्डिंग संख्या 18 ए ब्लॉक और 16 बी ब्लॉक की इमारतों का कनेक्शन काटा गया है.
उलझे रहिए होल्डिंग के पेंच में
जेएनएसी जब भी नक्शा विचलन व अवैध इमारतों पर सीलिंग की कार्रवाई करती है या फिर बिजली पानी का कनेक्शन काटा जाता है, जेएनएसी के अधिकारी व कर्मचारी भवन मालिक का नाम उजागर नहीं करते. नाम पूछने पर उनका कहना है कि उन्हें भवन मालिक का नाम पता नहीं है. यह बात किसी के गले नहीं उतरती. लोगों का कहना है कि जेएनएसी के अधिकारियों को पता होना चाहिए कि जिस भवन पर कार्रवाई हो रही है उसका मालिक कौन है. बिना मालिक का नाम जाने वह नोटिस कैसे भेजते हैं. अगर उन्हें नाम पता नहीं है तो पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठता है कि क्या वह बिना नोटिस किए ही कार्रवाई कर रहे हैं या हो सकता है कि वह बिना भवन मालिक का नाम जाने ही कार्रवाई कर रहे हों. इसी वजह से भवन मालिक को पता ही नहीं चलता कि क्या कार्रवाई हो रही है और वह नोटिस और सीलिंग के बाद भी निर्माण कार्य जारी रखते हैं. इसे भी पढ़ें: चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-the-proud-history-of-advocates-from-freedom-struggle-till-today-rajesh-shukla/">चाईबासा: अधिवक्ताओं का स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक गौरवमयी इतिहास- राजेश शुक्ल [wpse_comments_template]
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