कोर्ट ने सीओए को खत्म करने का दिया आदेश, एक हफ्ते के लिए टाला AIFF का चुनाव
झुनझुना के सहारे मंजिल पाने का प्रयास
फिलहाल दो-तीन झारखंडी गिरोह 1932 खतियान आधारित स्थानीयता नीति की मांग कर रहे हैं. जबकि 1932 खतियान आधारित स्थानीयता के नारे पर शिबू सोरेन-हेमंत सोरेन मंजिल पाकर अब इससे अपना पल्ला झाड़ लिया है. क्या बाकी भी इस झुनझुना के सहारे मंजिल पाना चाहते हैं. हेमंत सोरेन की सरकार ने खतियान के मामले पर झारखंड हाई कोर्ट के आदेश को शिरोधार्य करते हुए अपनी असमर्थता जाहिर कर दिया है. तो बाकी खतियान समर्थक या तो झारखंड हाई कोर्ट / सुप्रीम कोर्ट में जाकर झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करा दें. तभी तो जनता का विश्वास मिलेगा. अन्यथा झारखंडी जनता को बार-बार ब्लैकमेल करना अनुचित है.स्थानीय नीति निर्धारण में दिक्कत क्या है
विकल्प में 9 झारखंडी भाषाओं को केंद्रित करते हुए झारखंडी भाषा संस्कृति के आधार पर स्थानीयता नीति के निर्धारण के सवाल पर इनको दिक्कत क्या है? चूंकि वृहद झारखंड राज्य की मांग का आधार भी खतियान नहीं बल्कि झारखंडी भाषा संस्कृति (झारखंडी उप-राष्ट्रीयता) ही रहा है. झारखंड और झारखंडी जनहित को ध्यान में रखकर जिद से ज्यादा मगज का इस्तेमाल करना लाभ का सौदा हो सकता है. लोबिन हेम्ब्रम, गीताश्री उराओं, जयराम महतो, राजू महतो, लष्मीनारायन मुंडा, प्रेमशाही मुंडा, नरेश मुर्मू आदि मिल बैठकर पुनर्विचार करें तो बेहतर होगा. इसे भी पढ़ें : वैश्विक">https://lagatar.in/effect-of-global-economic-slowdown-xiaomi-laid-off-900-employees-other-companies-also-on-the-path-of-layoffs/">वैश्विकआर्थिक मंदी का असर , Xiaomi ने 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, दूसरी कंपनियां भी छंटनी की राह पर [wpse_comments_template]

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