- हाइकोर्ट से रिट याचिका खारिज होने के बाद विधायक ने लिया निर्णय
- याचिका खारिज करने के साथ न्यायालय ने दिये थे तीन विकल्प
- कहा-हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी तत्कालीन सरकार ने जांच के निष्कर्षों पर नहीं की कार्रवाई
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एसीबी ने की है इस मामले में प्राथमिक जांच
विधायक श्री राय ने अपने अधिवक्ता के परामर्श का हवाला देते हुए बताया है कि उन्होंने दूसरा विकल्प चुना है और शीघ्र ही रांची के डोरंडा अथवा धुर्वा थाना में उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्राथमिकी दर्ज करायेंगे. साथ ही मांग करेंगे कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में बंद लिफाफा में जो प्राथमिक जांच रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपा है, पुलिस उस रिपोर्ट को एसीबी से प्राप्त करें और उस पर कार्रवाई करें. उन्होंने कहा है कि एसीबी ने इस मामले में प्राथमिक जांच की है और मेरी रिट याचिका की सुनवाई के समय झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा मांगे जाने के बाद इसे बंद लिफाफा में न्यायालय को सौंपा है. इस प्राथमिक जांच रिपोर्ट में उन सभी अभियुक्तों के नाम हैं, जिनके विरूद्ध कार्रवाई के लिए थाना में एफआईआर करने का निर्देश उच्च न्यायालय ने दिया है. इसे भी पढ़ें : Jamshedpur">https://lagatar.in/jamshedpur-five-year-old-child-bitten-by-dog-in-mango/">Jamshedpur: मानगो में पांच साल के बच्चे को कुत्ते ने काटा
विरोधियों ने अफवाह फैलाया कि आरोपों को खारिज कर दिया गया है
श्री राय ने बताया है कि गत 26 जून को जब झारखंड उच्च न्यायालय ने उनकी रिट याचिका खारिज करने का निर्णय लिया तो आरोपी और उनके समर्थकों ने इसे उनके (सरयू राय) लिए एक बड़ा झटका बताया. ऐसा माहौल बनाया कि न्यायालय ने इस संबंध में आरोपों को खारिज कर दिया है. दो दिन बाद 28 जून को न्यायालय का निर्णय आने के बाद उनके मुंह पर तमाचा लगा है. क्योंकि न्याय निर्णय में न्यायाधीश ने श्री राय की याचिका में उल्लेखित उन बिन्दुओं का जिक्र किया है, जिसके अनुसार मेनहर्ट के परामर्शी चयन में भारी अनियमितताएं हुई हैं. इसे भी पढ़ें : Jadugoda">https://lagatar.in/jadugoda-society-expressed-displeasure-over-creation-of-posts-of-only-six-teachers-for-bhumij-language/">Jadugoda: भूमिज भाषा के लिये मात्र छह शिक्षकों के पद सृजन पर समाज ने जताई नाराजगी
तत्कालीन सरकार ने इस पर कार्रवाई नहीं की
रिट याचिका को न्यायालय ने केवल इस आधार पर खारिज किया है कि इस विषय में 28 सितंबर 2018 को झारखंड उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश की खंडपीठ ने पहले ही निर्णय दिया था कि ‘‘सरकार जांच के निष्कर्षों पर कार्रवाई करे.’’ लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस पर कार्रवाई नहीं की. इसलिए उच्च न्यायालय का कहना है कि इस मामले में एक बार जब दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने निर्णय दे दिया है, तो उस पर एकल पीठ का विचार करना उचित नहीं है. इसे भी पढ़ें : Jamshedpur">https://lagatar.in/jamshedpur-five-year-old-child-bitten-by-dog-in-mango/">Jamshedpur: मानगो में पांच साल के बच्चे को कुत्ते ने काटा श्री राय ने कहा है कि इसलिए न्यायालय ने निर्देश दिया है कि या तो मैं 28 सितंबर 2018 के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ के निर्णय को लागू कराने के लिए खंडपीठ के समक्ष जाउं अथवा थाना में एफआईआर दर्ज करांऊ या सक्षम न्यायालय में मुकदमा दर्ज करूं. श्री राय ने बताया है कि उन्होंने दूसरा विकल्प चुना है. साथ ही उन्होंने न्यायादेश की छायाप्रति भी सार्वजनिक की है. [wpse_comments_template]
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