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जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी : पहले मिलते थे 18 हजार, अब 12 हजार में कैसे चलेगा परिवार

Jamshedpur (Anand Mishra) : जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को अब एजेंसी के अधीन सौंप दिया गया है. इसके बाद से कर्मचारी मानसिक रूप से तो परेशान थे ही, अब उन्हें आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. वजह यह है कि इन कर्मचारियों को इस बार जो वेतन भुगतान किया गया है वह पूर्व की तुलना में करीब 6000 रुपये कम है. कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिसे पूर्व में जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज के समय 17-18 हजार रुपये मिलते थे, उन्हें एजेंसी की ओर से 12 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान किया गया है. इसे भी पढ़ें : अमित">https://lagatar.in/amit-shahs-big-statement-ipc-crpc-will-be-amended/">अमित

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कैसे चलेगा परिवार, कितना कमा रही एजेंसी

कर्मचारियों की मानें, तो महंगाई के इस दौर में एक तो पहले ही 17-18 हजार रुपये में परिवार चलता था. शिक्षा, स्वास्थ्य की जरूरतें पूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण होता था. ऐसे में कॉलेज से विश्वविद्यालय बनने के बाद वेतन में वृद्धि के बजाय कटौती कर दी गयी. कर्मचारियों का कहना है कि अपने करियर के 15-16 वर्ष यहां सेवा देने के बाद अब वे कहां जायें. इसके अलावा यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि इसमें एजेंसी एवर ग्रीन प्रति कर्मचारी कितना कमा रही है. मान लिया जाये कि विश्वविद्यालय एजेंसी को प्रति कर्मचारी पूर्व की दर से ही भुगतान कर रहा है, तो एजेंसी प्रति कर्मचारी कम से कम पांच-छह हजार रुपये की कमाई कर रही है. इसे भी पढ़ें : Air">https://lagatar.in/air-india-orders-840-aircraft-includes-option-to-buy-370-aircraft/">Air

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कंप्यूटर एजेंसी और कैंपस से किताब दुकान हटाने की कवायद

दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यहां इंटर कक्षाओं से कंप्यूटर क्लास का संचालन करने वाली एजेंसी को हटाने की कवायद चल रही है. इसके साथ ही कॉलेज कैंपस में स्थित किताब दुकान और स्टेशनरी दुकान को भी बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी चल रही है. जानकार सूत्रों की मानें, तो इसके लिए विशिविवद्यालय प्रशासन की ओर से एक चार सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है, जिसने पिछले दिनों उक्त मसले को लेकर बैठक की थी. उसके बाद कंप्यूटर एजेंसी, किताब दुकानदार और स्टेशनरी दुकानदार को नोटिस दिया गया है. कंप्यूटर एजेंसी संचालक अमर कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन हटाता है, तो इसमें कोई बात नहीं है, लेकिन विश्वविद्यालय के पास उनके दो लाख रुपये से अधिक जमा हैं. अतः विश्वविद्यालय प्रशासन पहले हिसाब करे, उसके बाद कोई निर्णय ले. [wpse_comments_template]

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