Jamshedpur (Anand Mishra) : जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की स्थापना हुए एक साल होने को है. यूनिवर्सिटी बनने के साथ ही यहां छात्राओं की संख्या भी हर साल बढ़ती जा रही है. इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में शिक्षक-शिक्षक्षिकाओं की संख्या घटती जा रही है. जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज के यूनिवर्सिटी बनने के बाद भी यहां शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के स्वीकृत पदों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है. मुट्ठी भर शिक्षक-शिक्षिकाओं के भरोसे हजारों छात्राओं का करियर तैयार हो रहा है. इन शिक्षक-शिक्षिकाओ में से ही कुछ को रजिस्ट्रार, डीएसडब्ल्यू, प्रॉक्टर, सीवीसी, सीसीडीसी आदि पदों की जिम्मेवारी भी सौंपी गयी है. इस वजह से वे ठीक से क्लास भी नहीं ले पाते है. इसे भी पढ़ें : 2000">https://lagatar.in/a-total-of-1-80-lakh-crore-rs-2000-notes-were-returned-to-the-banks-in-17-days/">2000
के नोट एक्सचेंज और जमा : 17 दिनों में बैंकों के पास 1.80 लाख करोड़ वापस आये
जूनियर एशिया कप : सेमी फाइनल में पहुंची टीम इंडिया, चीनी ताइपे को 11-0 से दी मात
: विद्युत विभाग निर्बाध बिजली आपूर्ति के नाम पर बेधड़क काट रहा पेड़ों को
: अंचल कार्यालय से आवेदन रिजेक्ट होने के बाद अनुमंडल कार्यालय से निर्गत हो गया आवासीय प्रमाण पत्र
के नोट एक्सचेंज और जमा : 17 दिनों में बैंकों के पास 1.80 लाख करोड़ वापस आये
12 हजार छात्राएं, 22 शिक्षक-शिक्षिकाएंं
यूनिवर्सिटी में स्थिति यह है कि छात्राओं की संख्या के अनुपात में शिक्षक-शिक्षिकाओं की सख्या नगण्य है. विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यहां नामांकित छात्राओं की संख्या लगभग 12 हजार है. वहीं स्वीकृत पदों पर कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं की संख्या 22 है. जबकि विश्वविद्यालय में शिक्षक-शिक्षिकाओं के स्वीकृत पदों की संख्या 57 है. इस तरह कुल मिला कर विश्वविद्यालय में शिक्षक-शिक्षिकाओं के 35 पद रिक्त हैं. इसे भी पढ़ें : महिला">https://lagatar.in/womens-junior-asia-cup-team-india-reaches-semi-finals-beats-chinese-taipei-11-0/">महिलाजूनियर एशिया कप : सेमी फाइनल में पहुंची टीम इंडिया, चीनी ताइपे को 11-0 से दी मात
दो विभागों में शिक्षक नहीं
शिक्षकों की कमी की वजह से विश्वविद्यालय में कक्षाएं भी प्रभावित होती हैं. साथ ही विश्वविद्यालय में ऐसे दो विभाग हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं हैं. इनमें भूगोल और इतिहास विभाग शामिल है. वहीं भौतिकी विभाग को देखा जाये, तो इसमें एक शिक्षक हैं, उन्हे भी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का प्रभार सौंप दिया गया है. इसके अलावा कई ऐसे विभाग हैं, जो एक या दो शिक्षक-शिक्षिकाओं के भरोसे ही चल रहे हैं और छात्राओं की सख्या हजार में है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-electricity-department-fearlessly-cutting-trees-in-the-name-of-uninterrupted-power-supply/">आदित्यपुर: विद्युत विभाग निर्बाध बिजली आपूर्ति के नाम पर बेधड़क काट रहा पेड़ों को
कैसे लागू होगी एनईपी-2020
हालांकि यह स्थिति जमशेदपुर वीमेस यूनिवर्सिटी की ही नहीं है. लेकिन एक तरफ जहां राज्य के विश्वविद्यालयों में नयी शिक्षा नीति-2020 को लागू किया गया है और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद किया जाता है, वहीं महिला यूनिवर्सिटी की ही यह स्थिति है. जानकार बताते हैं कि एनईपी के प्रावधानों के मुताबिक 30-35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है. तभी इसके उद्देश्यों को पूरा कर पाना संभव है. बावजूद करीब 40 वर्ष पूर्व निर्धारित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के स्वीकृत पदों को लेकर ही विश्वविद्यालय और कॉलेजों का संचालन हो रहा है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-after-the-application-was-rejected-from-the-circle-office-residential-certificate-was-issued-from-the-subdivision-office/">जमशेदपुर: अंचल कार्यालय से आवेदन रिजेक्ट होने के बाद अनुमंडल कार्यालय से निर्गत हो गया आवासीय प्रमाण पत्र
Leave a Comment