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जामताड़ा : चिरुडीह सामूहिक हत्याकांड के 8वें आरोपी को उम्रकैद की सजा

महाजनी प्रथा के खिलाफ 23 जनवरी 1975 को 11 लोगों की हुई थी हत्या

Jamtara : महाजनी प्रथा व जमींदारों के शोषण के विरोध में 23 जनवरी 1975 को चिरुडीह गांव में 11 लोगों की सामूहिक हत्या हुई थी. जामताड़ा एडीजे-वन संतोष कुमार की अदालत ने बुधवार को आठवें आरोपी रमाकांत दत्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई. उस पर 5 हजार रुपये आर्थिक दंड भी लगाया. जामताड़ा थाना क्षेत्र के श्यामपुर निवासी 75 वर्षीय रमाकांत दत्ता को भादवि की धारा 302 में आजीवन कारावास, 307 में 10 वर्ष सश्रम कारावास, धारा 429 में 5 वर्ष कारावास धारा 436 में 10 वर्ष तथा धारा 148 में 3 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई. सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. सजा मुकर्रर होने के बाद आरोपी को पुनः जेल भेज दिया गया.  आरोप है कि रमाकांत दत्ता के पास से एक बंदूक मिली थी, जिसमें गोली के दो खोखा फंसे हुए थे. बंदूक का लाइसेंस जय कुमार सेन के नाम पर था, जो चिरुडीह हत्याकांड का आरोपी था.

यह है पूरा मामला

23 जनवरी 1975 को नारायणपुर थाना क्षेत्र के बांसपहाड़ी, रजैया, चिरुडीह, तरनी,मुचियाडी व रसियाभिट्ठा गांव के निकट नदी के किनारे आरोपी व अन्य ग्रामीण घातक हथियार से लैस होकर जमा हुए थे. आरोप है कि इनलोगों ने 11 लोगों की हत्या कर दी थी. घटनास्थल से पुलिस ने 7 बंदूकें भी बरामद की थी. उक्त मामले में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को भी नामजद आरोपी बनाया गया था. हालांकि 6 मार्च 2008 को जामताड़ा के तत्कालीन एडीजे-वन की अदालत ने शिबू सोरेन व कुछ अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था. जबकि सात आरोपी जयदेव टुडू, नाथनियाल हेम्ब्रम, सत्यनारायण पोद्दार, जय कुमार सेन, झगरु पंडित, मोहम्मद खलील व सिकंदर मियां को हत्या का दोषी करार दिया गया था. दोषी करार दिए जाने के बाद सभी आरोपियों ने झारखंड उच्च न्यायालय में अपील दायर की और जमानत पर मुक्त हुए. हालांकि उनकी याचिका अभी भी झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-a-bed-and-two-shops-caught-fire-in-barmasia-property-worth-lakhs-burnt/">धनबाद

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