Jamtara : झारखंड तहरीक ए उर्दू तंजीम की जामताड़ा जिला कमिटी के अध्यक्ष अलीमुद्दीन अंसारी ने 28 जुलाई को एक बयान जारी कर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से जामताड़ा जिला स्थित उर्दू स्थापित विद्यालयों को पूर्व की भांति शुक्रवार को अवकाश और रविवार को पठन-पाठन संचालन की मांग की. कहा कि जामताड़ा जिला में विभिन्न प्रखंडों में उर्दू स्थापित विद्यालयों को शिक्षा विभाग अपने मनमानी तरीके से विद्यालय का संचालन करवा रही है. आरोप है कि शिक्षा विभाग जबरदस्ती उर्दू स्थापित विद्यालयों से उनके उर्दू शब्द को मिटाकर शुक्रवार को संचालन और रविवार को विद्यालय बंद रखने पर बाध्य कर रही हैं. उन्होने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय का भौतिक सत्यापन नहीं किया गया है. पुराने दस्तावेज, शिक्षकों की उपस्थिति पंजी में अवकाश शुक्रवार को हमेशा दर्ज होता आ रहा है और रविवार को पठन-पाठन. शिक्षा विभाग के इस मनमानी रवैया से जिला के अल्पसंख्यक उर्दू भाषी छात्र-छात्राओं के बीच काफी निराशा का माहौल है. उर्दू तंजीम के सचिव नाजिर हुसैन ने बताया कि शिक्षा विभाग के इस मनमानी रवैया से देश के गंगा जमुना तहजीब को काफी आघात पहुंचा है. यहां सभी जाति धर्म समुदाय के लोग उर्दू पढ़ाई करते हैं. मुंशी प्रेमचंद और कृष्ण चंद्र जैसे अनेक विद्वान लेखक उर्दू में ख्याति प्राप्त किए हैं. उर्दू सिर्फ मुसलमानों की भाषा नहीं है मगर इसे एक जाति विशेष समुदाय से जोड़कर देखा जा रहा है जो गलत है. यह">https://lagatar.in/jamtara-villagers-allege-pds-dealer-is-deducting-three-kg-of-grain-per-unit/">यह
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जामताड़ा : उर्दू स्थापित विद्यालयों को पूर्व की भांति यथावत संचालन की मांग

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