Jamtara : जमाताड़ा के नारायणपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा निर्माणाधीन मोटर हाउस के दूसरे तल्ले की छत ढलाई के महज कुछ घंटे बाद ही भरभराकर गिर गई.
करीब दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में हुई ढलाई का इस तरह ध्वस्त हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. हालांकि राहत की बात यह रही कि हादसे के समय छत के नीचे कोई मजदूर या मिस्त्री मौजूद नहीं था. यदि उस समय श्रमिक कार्यस्थल पर होते तो बड़ा हादसा हो सकता था.
जानकारी के अनुसार रविवार सुबह से प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित पुरानी पानी टंकी के समीप निर्माणाधीन मोटर हाउस के दूसरे तल्ले की छत की ढलाई का कार्य चल रहा था.
देर शाम ढलाई पूरी होने के कुछ ही समय बाद अचानक छत का बड़ा हिस्सा तेज आवाज के साथ नीचे गिर पड़ा. घटना के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग मौके पर जुट गए.
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी भवन की छत ढलाई के कुछ घंटे बाद ही गिर जाना बेहद गंभीर मामला है. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया हो या तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया हो. लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है.
विभागीय निगरानी पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि रविवार होने के कारण निर्माण स्थल पर विभाग के कोई वरीय अभियंता या कनीय अभियंता मौजूद नहीं थे. ऐसे में लाखों रुपये की लागत से चल रहे निर्माण कार्य की निगरानी किस प्रकार की जा रही थी, यह बड़ा सवाल बन गया है.
लोगों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान नियमित तकनीकी निरीक्षण होता, तो संभवतः इस तरह की घटना टाली जा सकती थी.
जल जीवन मिशन के तहत हो रहा है निर्माण
बताया जा रहा है कि यह निर्माण कार्य केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत कराया जा रहा है. योजना का उद्देश्य मैथन डैम से पानी लिफ्ट कर नारायणपुर प्रखंड की विभिन्न पंचायतों तक पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है.
पिछले करीब दो वर्षों से इस परियोजना के तहत विभिन्न स्थानों पर पानी टंकियों, मोटर हाउस और अन्य आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है. कई पंचायतों में कार्य पूरा हो चुका है, जबकि कई स्थानों पर निर्माण अभी जारी है.
जांच और कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई. लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित संवेदक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही इतनी बड़ी खामी सामने आ गई है, तो भविष्य में भवन के उपयोग के दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग इस गंभीर घटना की जांच कर दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करता है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
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