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Jamtara News :  कागजों में चमकते आयुष्मान आरोग्य मंदिर! जमीनी हकीकत में बदहाल व्यवस्था

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सुविधाओं का अभाव
  • न पानी, न बिजली, न रखरखाव
  • कागजों में विकास, जमीनी हकीकत बदहाल
  • रखरखाव के नाम पर खर्च हुई राशि पर सवाल

Jamtara :   आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कथित तौर पर कागजों पर प्रसव दिखाए जाने के मामले के बाद अब इन स्वास्थ्य केंद्रों की जमीनी स्थिति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला माने जाने वाले कई केंद्रों की हालत व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर बयां करती नजर आ रही है. 

 

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. कहीं पेयजल की व्यवस्था नहीं है, तो कहीं बिजली की समस्या बनी हुई है. कई भवनों के दरवाजे और खिड़कियों में दीमक लग गए हैं. भवनों के दरवाजे टूटे हुए हैं और साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है.

 

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रखरखाव मद की राशि पर उठ रहे सवाल

सरकार द्वारा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संचालन एवं रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष राशि उपलब्ध कराई जाती है. मुख्यमंत्री रखरखाव मद और अन्य योजनाओं के तहत मिलने वाली इस राशि का उद्देश्य भवनों की मरम्मत, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करना है. 


लेकिन जब जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों की हालत बदहाल नजर आती है, तब स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि रखरखाव के लिए मिलने वाले लाखों रुपये आखिर खर्च कहां हो रहे हैं? यदि राशि नियमित रूप से जारी हो रही है तो फिर भवनों की स्थिति इतनी खराब क्यों है?

 

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स्वास्थ्य केंद्रों का भौतिक सत्यापन करने की मांग

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर उपलब्धियों का दावा करने के बजाय स्वास्थ्य केंद्रों का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए. उनकी मांग है कि बीते वर्षों में रखरखाव मद में कितनी राशि मिली, उसका उपयोग किस कार्य में हुआ और उसका वास्तविक लाभ स्वास्थ्य केंद्रों को मिला या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए.

 

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जवाबदेही तय करने की जरूरत

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि रखरखाव के लिए आवंटित राशि का सही उपयोग नहीं हुआ या कार्य केवल कागजों तक सीमित रहा, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.  उनका कहना है कि सरकारी धन का उपयोग जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए होनी चाहिए, ना कि फाइलों में खर्च दिखाने के लिए.

 

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स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर नजर

ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय यह है कि जब कई स्वास्थ्य केंद्रों में पानी, बिजली, भवन मरम्मत और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो रखरखाव के नाम पर मिलने वाली राशि का हिसाब कौन देगा? 

 

अब लोगों की निगाहें जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर टिकी हैं. अब देखना होगा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की बदहाल स्थिति और खर्च की गई राशि की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर व्यवस्था की खामियां कागजी उपलब्धियों के पीछे छिपी रह जाएंगी?

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