Search

 
 
 

Jamtara News: बराकर नदी से बेखौफ बालू उठाव का खेल, माइनिंग इंस्पेक्टर अनजान

Jamtara News: गुरुवार को धनबाद की ओर से पहुंचे छोटे ट्रकों में कथित रूप से बालू लोड करते देखा गया. वाहन चालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वे यहां करीब 4500 रुपये में बालू खरीदते हैं और धनबाद में 10 से 12 हजार रुपये तक में बेचते हैं.
 
एनजीटी के आदेश का असर धरातल पर बेअसर
  • बराकर नदी से धड़ल्ले से उठ रहा बालू
  • 4500 में बालू खरीदकर धनबाद में 10-12 हजार में बिक्री
  • अफसरों की ‘नजर’ आखिर कहां?

Jamtara News: जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र के बराकर नदी में बालू का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है. चितामी, दक्षिणबहाल समेत आसपास के इलाकों में नदी से बड़े पैमाने पर बालू का उठाव कर उसका स्टॉक किया जा रहा है. इसके बाद यही बालू ऊंची कीमतों पर दूसरे इलाकों में बेचा जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि एनजीटी का आदेश कागजों पर भले प्रभावी हो, लेकिन बराकर नदी के किनारे पहुंचते ही उसका असर धरातल पर बेअसर नजर आता है.


इसे भी पढ़ें:


गुरुवार को धनबाद की ओर से पहुंचे छोटे ट्रकों में कथित रूप से बालू लोड करते देखा गया. वाहन चालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वे यहां करीब 4500 रुपये में बालू खरीदते हैं और धनबाद में 10 से 12 हजार रुपये तक में बेचते हैं.

 

चालकों के अनुसार नदी से बालू निकालकर स्टॉक करने वाले व्यक्ति से ही उन्हें बालू उपलब्ध कराया जाता है. उनका दावा है कि सामान्य दिनों में इस स्थान से प्रतिदिन करीब 20 से 25 गाड़ी बालू बाहर भेजा जाता है. बारिश तेज होने पर जरूर कारोबार की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाती है.

प्रतिबंध नदी में, कारोबार जमीन पर बेखौफ

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एनजीटी ने नदियों से बालू खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है, तो बराकर नदी में कथित तौर पर यह खेल किसकी शह पर चल रहा है? क्या स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है?

 

बालू के अवैध कारोबार को लेकर इलाके में चर्चाएं आम हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर तस्वीर धुंधली नजर आती है. लोगों का कहना है कि यदि नदी से रोजाना दर्जनों वाहन बालू लेकर निकल रहे हैं, तो फिर जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम की है?

अधिकारी बोले—जानकारी नहीं थी

मामले में माइनिंग इंस्पेक्टर अजित कुमार चौधरी ने कहा कि उन्हें बालू उठाव की जानकारी नहीं थी. घटनास्थल पर जाकर मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

अब देखना यह है कि अधिकारी के इस बयान के बाद जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या बराकर नदी के किनारे वास्तव में कार्रवाई का असर दिखाई देता है.

‘मौन’ से बढ़ रहा कारोबारियों का मनोबल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से बालू का अवैध कारोबार चलने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं. सवाल सिर्फ बालू चोरी का नहीं, बल्कि नदी और पर्यावरण की सुरक्षा का भी है.

 

एनजीटी की रोक के बावजूद यदि नदी से बालू उठता रहा और अधिकारी कहते रहें कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है—आखिर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था किसके लिए है?

 

क्या कार्रवाई के लिए दिल्ली से एनजीटी के अधिकारियों को बराकर नदी तक आना पड़ेगा, या स्थानीय खनन विभाग और अंचल प्रशासन खुद अपनी जिम्मेदारी निभाएगा? फिलहाल बराकर नदी से उठते बालू और निकलते वाहनों के बीच यही सवाल इलाके में तैर रहा है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही