- नाला के पाथरघट्टा व महेशमुंडा में बालू का अवैध खनन
- एनजीटी व जिला प्रशासन के आदेश की उड़ रहीं धज्जियां
Jamtara News : झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो के विधानसभा क्षेत्र नाला में अजय नदी से बालू का अवैध खनन का कारोबार खुलेआम चल रहा है. पाथरघट्टा व महेशमुंडा इलाके में नदी से दिनदहाड़े बालू का खनन और उसे ट्रकों पर लोडकर ढुलाई की जा रही है. स्थानीय सूत्रों का दावा है कि बालू माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत है कि बाहरी लोगों के लिए खनन क्षेत्र तक पहुंचना भी मुश्किल है. नदी और बालू खनन की तस्वीर लेने पर कैमरे तोड़ने की धमकी दी जाती है.
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स्थानीय लोगों के अनुसार, बालू माफियाओं का इलाके में इतना दबदबा है कि पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई भी नजर नहीं आती. सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में आसपास के बालू घाटों से बड़े पैमाने पर बालू उठाने की तैयारी है.
आवास के 20 किमी के दायरे में खनन, फिर भी कार्रवाई नहीं
विधानसभा अध्यक्ष के आवास से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर पाथरघट्टा क्षेत्र में अजय नदी से बालू का उठाव हो रहा है. बालू लदे ट्रकों को आसनसोल-दुमका मुख्य मार्ग से पश्चिम बंगाल के बरहमपुर, बीरभूम, मालदा व लोहापुर तक भेजा जा रहा है. एनजीटी व जिला प्रशासन के निर्देशों के बावजूद कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लगने से पुलिस, खनन विभाग और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
दयानंद होटल के पीछे जुटते हैं वाहन
मिली जानकारी के अनुसार, बालू ले जाने के लिए सभी वाहन दयानंद होटल के पीछे खड़े किए जाते हैं. इसके बाद बालू लोड कर उन्हें गंतव्य के लिए भेजा जाता है. अब तो रात के साथ दिन में भी पाथरघट्टा इलाके से बालू लोड कर वाहनों को अलग-अलग रास्तों से रवाना किया जाता है.
आसनसोल-दुमका रोड पर दयानंद होटल के सामने पाथरघट्टा जाने वाले रास्ते में दुर्गा मंदिर के पीछे दिनदहाड़े ट्रकों में बालू की लोडिंग होती है. प्रति ट्रक बालू लोड करने और रोड पार करा के लिए 50 से 55 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं. ओवरलोडिंग करने पर प्रति बैकेट 300 रुपये लिए जाते है.
राजनीतिक संरक्षण की चर्चा, पुलिस पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर इस अवैध कारोबार को पुलिस और राजनीतिक संरक्षण मिलने की चर्चा है. राजेश शेख, लंबू शेख, उत्तम और रविदास समेत कुछ लोगों के नाम कारोबार से जुड़े होने की चर्चा में हैं. अब सवाल यह है कि यदि अजय नदी क्षेत्र में दिनदहाड़े अवैध बालू खनन हो रहा है, तो जिला प्रशासन और पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे. खनन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. पूरे मामले की जांच कर अवैध खनन रोकने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है.
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