Jamtara : झारखंड पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने जामताड़ा टाउन हॉल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बांग्लादेशी घुसपैठियों और धर्मांतरण के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि संथाल परगना के पाकुड़ एवं साहिबगंज समेत कई हिस्सों में आदिवासी समाज अल्पसंख्यक हो चुका है, जबकि बांग्लादेशी घुसपैठिए हमारे समाज की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं.
चंपाई ने कहा कि समाज की जो बेटियां बाहर शादी कर रही हैं, उन्हें संविधान द्वारा मिले आरक्षण में अतिक्रमण करने का कोई अधिकार नहीं है. धर्मांतरण करने वाले लोगों को आड़े हाथों लेते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि जो भी व्यक्ति हमारी परंपराओं एवं रूढ़िवादी व्यवस्था से बाहर निकल चुका है, उसे आरक्षण नहीं मिलना चाहिए.
आदिवासी समाज दोतरफा मार झेल रहा
चंपाई ने कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज दोतरफा मार झेल रहा है. एक ओर बांग्लादेशी घुसपैठिये भूमिपुत्रों की जमीनें लूट रहे हैं, हमारे समाज की बेटियों से विवाह कर पिछले दरवाजे से संविधान द्वारा दिए गये अधिकारों में अतिक्रमण कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग भोले-भाले आदिवासियों को ठग कर, उन्हें लालच देकर अथवा उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर उनका धर्मांतरण कर रहे हैं. उन्होंने संथाल परगना समेत पूरे झारखंड में आदिवासियत की लड़ाई को मुकाम तक पहुँचाने का रोडमैप साझा करते हुए कहा कि कुछ महीनों में “आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा” द्वारा एक महाधिवेशन बुलाया जायेगा, जिसमें 10 लाख से अधिक आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे.
यह भी पढ़ें : बजट सत्रः सदन में एक लाख 45 हजार 400 करोड़ का बजट पास