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जेफरी एप्सटीन : हमारे लोग अच्छे आदमी हैं, वे दिन वाले कस्टमर थे

Manish Singh

 

एक अनोखा तर्क निकालकर परोसा गया है, जिससे व्हाट्सएप योद्धाओं को अंततः एप्सटीन नस्ती बांधने को रस्सी मिल गई है. यह कि एप्सटीन भिया के दो काम थे. दिन में वह लाइजनिंग, सेटिंग, पावर ब्रोकिंग का काम करते थे.

 

इस काम में उनके अलग कस्टमर थे. लेकिन रात में जो दूसरी किस्म की दलाली करते थे, उसके कस्टमर अलग थे. हमारे नेता लोग अच्छे आदमी हैं. वे दिन वाले कस्टमर थे. रात के नहीं. विद्या कसम.
 

 

अमेरिका में लॉबीइंग एक वैध बिजनेस है. बकायदे सैकड़ों फर्म चलती है, जो लॉबीइंग करती है. पैसे लेती है, अमेरिकी सांसदों और सरकार के हलको में जाकर, मिलकर, अपने क्लाइंट के काम करवाती है, पॉलिसी बनवाती है. 

 

WION की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान US ट्रेड डील के लिए भी भारतीय दूतावास के माध्यम से 2 लॉबीइंग फर्म को ठेका दिया गया. उसने मीटिंग अरेंज कराई, ट्रेड पॉलिसी और द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत के हितों पर माहौल बनवाने को सहयोग किया.

 

इसके पहले भी इस तरह की फर्म, काम पर लगाई जाती रही है. पाकिस्तान, इजराइल, यूरोप सहित दुनिया भर के देश इन लॉबीइंग फर्म की सेवा लेते हैं. जिस चीज के लिए आपके पास सैंकड़ों साफ सुथरे प्रोफेशनल विकल्प मौजूद हैं, आप किसी भी ऐसे की शरण में क्यों जाते हो, जो बकायदे 2008 से ही प्रमाणित, सजयाफ्ता अपराधी रहा है. 

 

एक दौर में मुंबई के बिल्डर अपने विवाद सुलझाने के लिए दाऊद इब्राहिम से मदद लेते थे. जब ऑफिशियल कोर्ट्स मौजूद हैं, तो उन लोगों का दाऊद की मदद से मामला सुलझाना, उनकी बदनीयती दिखाता है और संगठित अपराध से उनके वैध-अवैध रिश्तों को ही उजागर करता है. तब क्या यह तर्क काम आएगा कि दाउद के नारकोटिक्स या आतंक के कारोबार से हमें लेना देना नहीं?

 

एप्सटीन के बारे में तमाम बातें, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सबको पता थी. कन्विक्ट आदमी था, फिर भी आप उसके साथ "प्रोफेशनल रिश्ते" गांठने चले गए. इरर ऑफ जजमेंट तो है ही.  तिस पर पवन खेड़ा ने खुलासा किया है कि डिजिटल इंडिया लांच होने के पहले इसकी डिटेल्स, हरदीप पुरी ने एप्सटीन से साझा की. यह इरर नहीं, ब्लंडर इन जजमेंट है.

 

एक तो लोकसभा, राज्यसभा मिलाकर 350 से ज्यादा सांसद हैं आपके पास, लेकिन ऐसा गटर छाप कैंडिडेट सलेक्शन कि इनमें मंत्री बनने लायक लोग आपके पास नहीं. तो ब्यूरोक्रेसी से उधार में लाए रिटायर्ड, अनइलेक्टेड लोगों को महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए गए. अब इस तरह के ब्लंडर के बावजूद, अहंकार और जिद में उन्हें ढो रहे हैं और खामियाजा देश भुगत रहा है.

 

डिस्केलमर :  ये लेखक के निजी विचार हैं...

 

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