Lagatar Desk-झारखंड में कोयले की भारी कमी को लेकर कई पावर सप्लाई कंपनी संकट से गुजर रहे हैं. बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड (BPSCL) के पास अब केवल तीन दिन का कोयला स्टॉक बचा है. सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) से कोयले की आपूर्ति अनियमित होने से यह स्थिति बनी है.
प्लांट के कामकाज के लिए लगभग 240 MW और टाउनशिप की मांग के लिए 55 MW बिजली की जरूरत होती है. यह बिजली BPSCL और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) से ली जाती है. जबकि BSL को प्लांट के कामकाज के लिए लगभग 240 MW और टाउनशिप की मांग के लिए 55 MW बिजली की जरूरत होती है. BPSCL की स्थापना 2001 में हुई थी; यह स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और दामोदर वैली कॉरपोरेशन की एक संयुक्त उद्यम कंपनी है.
हाल के कुछ हफ्तों में, DVC और SAIL के संयुक्त उपक्रम (joint venture) में बिजली उत्पादन 190 MW से घटकर लगभग 130-150 MW रह गया है. इससे बोकारो स्टील प्लांट (BSL) और टाउनशिप में बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है. CCL और BCCL से नियमित आपूर्ति नहीं होने के कारण मंगलवार को बोकारो टाउनशिप में रोटेशन के आधार पर बिजली कटौती की गई.
इससे पहले पिछले महीने सितंबर में बोकारो के ललपनिया स्थित तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन में कोयले का संकट गहरा गया था. तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड यानी TVNL प्रबंधन ने इस गंभीर स्थिति को लेकर राज्य सरकार और CCL के अधिकारियों को पत्र भेजकर तत्काल कोयला आपूर्ति बढ़ाने की मांग की थी. दरअसल, CCL की खुली खदानों में जलजमाव के कारण कोयला उत्पादन और डिस्पैच दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
क्या है BPSCL में ताजा संकट
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक BPSCL के CEO सुधीर व्यास ने बताया है, "प्लांट को सामान्य रूप से चलाने के लिए रोजाना लगभग 4,000 टन कोयले की जरूरत होती है. पहले हर दिन कोयले की एक पूरी रैक (ट्रेन) आती थी, लेकिन अब कोयले की खेप हर दो-तीन दिन में आ रही है."
आपूर्ति और जरूरतों के मद्देनजर उपलब्ध बिजली को अलग-अलग समय पर कटौती (staggered outages) के जरिए बांटा जा रहा है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कोई भी इलाका लंबे समय तक बिना बिजली के न रहे और लोगों को अपने इनवर्टर चार्ज करने का समय मिल सके.
मानसून के दौरान कोयले की आपूर्ति में रुकावट आने से खनन और परिवहन (transportation) पर भी असर पड़ा है. सुधीर व्यास ने कहा, "हमने संबंधित कोयला कंपनियों से आपूर्ति को सामान्य करने का आग्रह किया है. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कोयले का सीमित स्टॉक है. अगर जल्द ही कोयले की नई खेप नहीं आती है, तो बिजली उत्पादन और भी कम हो सकता है."
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर कोयले की आपूर्ति में और कमी आती है, तो टाउनशिप में बिजली संकट और गहरा सकता है और स्टील प्लांट के कामकाज पर भी बुरा असर पड़ सकता है.