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झारखंड : लाह उत्पादन से जुड़े 73 हजार किसान, महिला कृषक हो रहीं सशक्त : सूरज कुमार

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Ranchi : झारखंड में वनोपज को बाजार दिलाने और इससे जुड़े लोगों की समृद्धि के प्रति किये जा रहे प्रयास के सकारात्मक परिणाम सामने आने आ रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के जरिए लाह की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. राज्य की ग्रामीण महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर आमदनी बढ़ोतरी के प्रयासों को अमलीजामा पहनाया जा रहा है. लाह की खेती से महिलाएं ना सिर्फ अपने गांव में रहकर ही अच्छी आमदनी कर रही हैं, बल्कि राज्य में लाह उत्पादन के आंकड़ों में भी बदलाव ला रही है. ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के जरिये सखी मंडल की ग्रामीण महिलाओं को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़कर अत्याधुनिक प्रशिक्षण के जरिए आमदनी बढ़ोतरी के प्रयास हो रहे हैं. इस पहल से राज्य के 73 हजार से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को लाह की वैज्ञानिक खेती से जोड़ा गया है, जिनमें ज्यादातर अति गरीब एवं वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीण परिवार हैं. इस साल करीब 2000 मीट्रिक टन छिला लाह का उत्पादन इनके द्वारा किया गया है. इसे भी पढ़ें - JSSC">https://lagatar.in/jssc-rules-challenged-in-hc-the-applicant-said-matriculation-done-from-jharkhand-inter-bihar-unable-to-fill-the-examination-form-it-is-a-violation-of-fundamental-right/">JSSC

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लाह की वैज्ञानिक खेती से बढ़ रही आमदनी

पश्चिमी सिंहभूम के गोईलकेरा प्रखंड के रूमकूट गांव की रंजीता देवी लाह की खेती से सालाना 3 लाख रुपए तक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं. रंजीता देवी बताती हैं-  दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण हमारी आजीविका मुख्यतः जंगल और वनोपज पर निर्भर करती है. सखी मंडल से जुड़ कर हमें 25 दिनों की सीआरपी ड्राइव के द्वारा वैज्ञानिक विधि से लाह की खेती करना सिखाया गया. इस प्रकार सखी मंडल के माध्यम से लाह की आधुनिक खेती से संबंधित प्रशिक्षण के साथ 5 किलो बिहन लाह (बीज के रूप में) प्राप्त हुआ. लाह की खेती में रंजीता देवी कम खर्च में कई गुना ज्यादा उपज एवं मुनाफा कमा रही हैं. पिछले साल रंजीता ने 300 किलो बिहन लाह बीज के रूप में लगाया, जिससे उन्हें 15 क्विंटल लाह की उपज प्राप्त हुई. उससे उन्हें 3 लाख रुपए की आमदनी हुई.

किसानों को मिल रहा प्रशिक्षण एवं बाजार

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के अंतर्गत महिला किसानों को लाह उत्पादन और बिक्री के लिए तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण से लेकर बिक्री हेतु बाज़ार भी उपलब्ध कराया जा रहा है. राज्य भर में 460 लाह संग्रहण केंद्र और 25 ग्रामीण सेवा केंद्र का परिचालन किया जा रहा है. ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित इन संस्थाओं के माध्यम से लाह की खेती कर रहे किसान अपनी उपज को एक जगह इकठ्ठा करते हैं और फिर ग्रामीण सेवा केंद्र के माध्यम से एकत्रित उत्पाद की बिक्री की जाती है.

क्या कहते हैं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जेएसएलपीएस

सूरज कुमार ने कहा- लाह की वैज्ञानिक खेती के जरिए राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है. राज्य के करीब 73 हजार लोगों को लाह की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण देकर उनको लाह उत्पादन से जोड़ा गया है. महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना एवं जोहार परियोजना के जरिए राज्य के कई इलाकों में लाह की खेती को पुनर्जीवित किया गया है. वहीं ग्रामीण सेवा केंद्र एवं संग्रहण केंद्र के माध्यम से किसानों को लाह का बेहतर बाजार एवं कीमत सुनिश्चित किया जा रहा है. इसे भी पढ़ें - चतराः">https://lagatar.in/chatra-smuggler-arrested-with-huge-quantity-of-ganja-police-gathering-information-about-gang-members/">चतराः

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