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दिल्ली के निशाने पर झारखंड और सीएम हेमंत : झामुमो

  • बाबूलाल अपनी सभ्यता-संस्कार न भूलें, भाषा पर लगाम लगाएं, बिधुरी के नक्शे कदम पर न चलें
  • भाजपा के प्रवक्ता अब बन गये हैं ईडी के प्रवक्ता, किसी भी आवेदन या पिटीशन में त्रुटि आम बात
  • भाजपा और बाबूलाल के भी कई पिटीशन में हाइकोर्ट ने आपत्तियां की, यह रूटीन प्रक्रिया है
Ranchi : झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नया पेसा कानून लाने जा रहे हैं. एक बार फिर से जल, जंगल और जमीन पर अधिकार ग्रामसभा का हो जाएगा. इसका डर अब भाजपा और उसके कॉरपोरेट साथियों को सताने लगा है. भाजपा के मित्रों और कारपोरोट जगत का जंगल और जमीन में प्रवेश थम जाएगा. इससे पूरी भाजपा भयभीत है. क्योंकि भाजपा कभी नहीं चाहती है कि आदिवासी, दलित, किसान, गरीब, पिछड़ा और अल्पसंख्यकों को उनका अधिकार मिले. इसके कारण भाजपा के लोग डरे हुए हैं. राजनीतिक रूप से तो हमसे मुकाबला नहीं कर सकते हैं, इसलिए कभी जांच एजेंसियों तो कभी अपने बड़बोले नेताओं के द्वारा अनाप-शनाप बुलवाते रहते हैं. इन सब कारणों से दिल्ली के निशाने पर झारखंड और झारखंड के आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आ गए हैं. मगर हमलोग इससे भयभीत होने वाले नहीं हैं. जनता सभी का जवाब देगी. 2024 का चुनाव आने वाला है. ये बातें झामुमो के केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कही.

 बिधुरी की भाषा बोलने लगे हैं

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि कल ही करमा बीता है. बाबूलाल जी झारखंड की सभ्यता-संस्कृति और परंपरा से भलीभांति परिचित हैं. इसलिए वे अपना संस्कार न भूलें. अपनी भाषा और शब्द चयन पर लगाम लगाएं. एक विस्थापित पूर्व सीएम एक स्थापित सीएम हेमंत सोरेन को जानवर कह रहे हैं. उनकी पार्टी के सांसद और नेता भाग हेमंत सोरेन भाग आदि शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह कहां की परंपरा और सभ्यता है. बाबूलाल और उनके नेता तो भाजपा सांसद बिधुरी की भाषा बोलने लगे हैं. बड़ी अजीब बात है कि एक केंद्रीय मंत्री संसद में बयान देती है कि मेरी बात सुनो और मानो, नहीं तो ईडी और सीबीआई लगा देंगे. इसका मतलब क्या है. मतलब साफ है कि भाजपा और केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधियों को अपने पक्ष में करने के लिए कर रही है.

हाईकोर्ट में पिटीशन दाखिल करना और उसमें त्रुटि सामान्य प्रक्रिया

सु्प्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि आज कल हर आवेदन डिजिटल इंडिया के माध्यम से किया जाता है. इसी तरह से हाईकोर्ट में भी ऑनलाइन आवदेन किया जाता है, जिसमें कई तरह प्रक्रिया होती है. इस प्रकिया में कुछ त्रुटियां रह जाती हैं, हो जाती हैं. यह सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 12 नवंबर 2020 को बाबूलाल जी ने स्पीकर के खिलाफ पिटीशन दाखिल किया था, जिसमें कई त्रुटियां थी, जिसे हाईकोर्ट ने इंगित कराते हुए इसे सुधार कर भेजने को कहा था. इसी प्रकार से 10 जनवरी 2020 को भाजपा स्पीकर के खिलाफ कोर्ट गयी थी, जिसमें त्रुटियां हुईं और कोर्ट ने सुधार करके भेजने कहा. मगर हमने तो इतनी छोटी सी बात कभी मीडिया में प्रचार नहीं किया. भाजपा के लोग इसे प्रचार करते हुए एक मुख्यमंत्री पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. ऐसा लगता है कि भाजपा के प्रवक्ता अब ईडी के प्रवक्ता भी बन गए हैं क्या. इसे भी पढ़ें – धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-government-of-brokers-and-corrupt-officers-in-jharkhand-police-deployed-in-recovery-babulal/">धनबाद

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