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Jharkhand : 2027 की जनगणना में आदिवासी धर्म दर्ज कराने की अपील

Ranchi : राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति, भारत के संयोजक देवकुमार धान ने कहा कि देश में वर्ष 2027 में जनगणना होना है. अभी से ही आदिवासी समाज को अपने धर्म के प्रति एकजुट होना है. धर्म के प्रति अपने आप को सतर्क रहने की भी जरूरत है. इसके अलावा आदिवासियों से अपने धर्म के रूप में आदिवासी (Tribal) धर्म दर्ज कराने की अपील की है.
 
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  • 5 करोड़ आदिवासी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को मनाते है

Ranchi : राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति, भारत के संयोजक देवकुमार धान ने कहा कि देश में वर्ष 2027 में जनगणना होना है. अभी से ही आदिवासी समाज को अपने धर्म के प्रति एकजुट होना है. धर्म के प्रति अपने आप को सतर्क रहने की भी जरूरत है. इसके अलावा आदिवासियों से अपने धर्म के रूप में आदिवासी (Tribal) धर्म दर्ज कराने की अपील की है. 

 

उन्होंने कहा कि देश में करीब 5 करोड़ आदिवासी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को मनाते है. उन्होंने बताया कि जिस प्रकार हिंदू समुदाय का धर्म हिंदू, मुस्लिम समुदाय का धर्म मुस्लिम, ईसाई समुदाय का धर्म ईसाई, सिख समुदाय का धर्म सिख, बौद्ध समुदाय का धर्म बौद्ध और जैन समुदाय का धर्म जैन के नाम से दर्ज है, उसी प्रकार आदिवासी समुदाय के धर्म का उल्लेख भी आदिवासी (Tribal) धर्म के रूप में होना चाहिए.

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देवकुमार धान

 

उन्होंने बताया कि सरना, जाहेर और देशावली जैसे स्थल आदिवासी समुदाय के पूजा स्थल हैं, न कि धर्म का नाम. देवकुमार धान ने बताया कि दुनिया में धर्मों की पहचान समुदाय के नाम से होती है, केवल पूजा स्थल के नाम पर किसी धर्म की पहचान नहीं होती. इसलिए आदिवासी समाज को अपनी धार्मिक पहचान को लेकर जागरूक होना चाहिए और इसके प्रति जागरूक करने की भी जरूरत है.

 

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