Ranchi : झारखंड में भाकपा माओवादी संगठन के कमजोर होते ही छोटे-छोटे अपराधी और उग्रवादी संगठन सक्रिय हो गये हैं. ये रंगदारी और लेवी वसूलने के लिए वाहनों में आगजनी और गोलीबारी की घटना को अंजाम दे रहे हैं. झारखंड में नक्सलवाद की समस्या 95 फीसदी खत्म हो चुकी है. छोटे-छोटे समूह में तब्दील होकर अपराधी और उग्रवादी संगठन आगजनी के साथ-साथ व्हाट्सएप कॉल पर कारोबारियों से रंगदारी की मांग कर रहे हैं.
लेवी के लिए वाहनों में आगजनी व गोलीबारी की घटना को दिया जा रहा अंजाम :
- - 01 अक्टूबर : हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में उग्रवादियों ने जमकर उत्पात मचाया था. उग्रवादियों ने एनटीपीसी के चट्टी बरियातु कोल माइंस से कोयला ट्रांसपोर्टिंग में लगे पांच हाइवा को आग के हवाले कर दिया था.
- - 30 नवंबर : पलामू के दोकरा क्रशर माइंस में अपराधियों ने फायरिंग की थी.
- - 30 नवंबर : रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र के रुक्का गांव स्थित हुटुप में सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनी श्रीराम इंटरप्राइजेज के प्लांट में चार अपराधियों ने फायरिंग कर टैंकर में आग लगा दी थी.
झारखंड में सक्रिय है ये मोस्ट एक्टिव अपराधिक गिरोह :
- - अखिलेश सिंह : जेल में बंद
- - अमन साहू : जेल में बंद
- - लव कुश शर्मा : जेल में बंद
- - विकास तिवारी : जेल में बंद
- - अमन श्रीवास्तव : जेल में बंद
- - डब्लू सिंह : फरार
- - प्रिंस खान : फरार
झारखंड में सक्रिय तीन बड़े उग्रवादी संगठनों में बचे हैं सिर्फ सात बड़े उग्रवादी
झारखंड में भाकपा माओवादी के अलावा कई छोटे-बड़े उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं. हालांकि राज्य में तीन उग्रवादी संगठन प्रमुख हैं. इनमें टीपीसी, पीएलएफआई और जेजेएमपी शामिल है. तीनों उग्रवादी संगठन समय-समय पर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर झारखंड पुलिस को चुनौती देने का काम करते हैं. वर्तमान में स्थिति यह है कि इन उग्रवादी संगठनों में सिर्फ सात बड़े उग्रवादी बचे हैं. इनमें टीपीसी के तीन, पीएलएफआई के एक और जेजेएमपी के तीन उग्रवादी शामिल हैं.
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