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झारखंड विस : अरूप चटर्जी बोले- कृषि, पशु व मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, इन्हें मजबूत करने की जरुरत

  • अरूप चटर्जी ने किसानों और मछुआरों की समस्याओं को सदन में उठा

Ranchi :  झारखंड विधानसभा बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान अरूप चटर्जी ने कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि ये विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन्हें मजबूत करना जरूरी है.

 

मत्स्य पालन पर उन्होंने कहा कि राज्य में मैथन और पंचेत जैसे बड़े जलाशय हैं, लेकिन वहां कई सालों से सही तरीके से मछली पालन नहीं हो रहा है. उन्होंने मांग की कि इन डैमों में दोबारा बड़े स्तर पर मछली का बीज डाला जाए.

 

उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी तालाबों की खुली नीलामी होनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता रहे और सरकार को ज्यादा राजस्व मिले. उन्होंने कहा कि झारखंड को मछली और मछली के बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. 

 

अरूप चटर्जी ने पोल्ट्री क्षेत्र पर बोलते हुए कहा कि राज्य अभी भी चूजे और अंडे के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है. अगर राज्य में बड़े स्तर पर पोल्ट्री फार्म खोले जाएं तो युवाओं को रोजगार मिलेगा.

 

गौ तस्करी और मछली तस्करी के मुद्दे पर चिंता जताते हुए निरसा विधायक ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में इस पर सख्त नजर रखी जानी चाहिए. कतरास के गौशाला में जगह कम पड़ रही है, इसलिए उन्होंने नई गौशालाएं बनाने की मांग की.

 

धनबाद के मेधा डेयरी प्लांट का जिक्र करते हुए कहा कि वहां दूध को प्रोसेस करने की पूरी सुविधा नहीं है. पाश्चराइजेशन के लिए दूध रांची भेजना पड़ता है. उन्होंने मांग की कि धनबाद में ही यह सुविधा शुरू की जाए, ताकि किसानों को फायदा हो.

 

निरसा में कृषि विभाग की जमीन पर हो रहे अतिक्रमण पर अरूप चटर्जी ने चिंता जताई और वहां कृषि पाठशाला खोलने की मांग की. साथ ही उन्होंने ड्रैगन फ्रूट, आम, लीची, मोरिंगा, तुलसी और जैविक हल्दी जैसी फसलों को बढ़ावा देने की बात कही.

 

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